अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. कवि रहीम के अनुसार प्रेम के धागे को किस प्रकार नहीं टूटने देना चाहिए?
उत्तर- कवि रहीम के अनुसार प्रेम के धागे को विश्वास की कमी व अहंभाव की ठेस से नहीं टूटने देना चाहिए ।
2. लोगों के साथ जीवन की किस अनुभूति को नहीं बाँटना चाहिए और क्यों?
उत्तर - लोगों के साथ दुख की अनुभूति को नहीं बाँटना चाहिए क्योंकि सामान्यतः लोग दूसरों को दुखी देखकर मन ही मन इठलाते हैं।
3. रहीम ने बड़े लोगों और छोटे अथवा सामान्य लोगों की तुलना किससे की है?
उत्तर - रहीम ने बड़े लोगों की तुलना तलवार से और छोटे अथवा सामान्य लोगों की तुलना सुई से की है।
4. मनुष्य को आपसी प्रेम-सद्भाव को बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए और क्यों? प्रेम का धागा टूटने से क्या परिवर्तन आता है? यह न टूटे, इसके लिए क्या अपेक्षित है?
उत्तर -मनुष्य को आपसी प्रेम और सद्भाव को बनाए रखने के लिए कभी-भी विश्वास की कमी या अहंभाव की ठेस से अपने संबंधों को नहीं तोड़ना चाहिए। भूलकर भी प्रेम में दरार नहीं डालनी चाहिए क्योंकि प्रेम रूपी धागा एक बार टूटने के पश्चात कभी जुड़ नहीं सकता। एक बार यदि प्रेम में दरार पड़ जाए तो लाख कोशिश करने पर भी व्यवहार में पहले जैसी समरसता नहीं आ पाती। दो धागों को जोड़ने से पड़ी गाँठ के समान मन में भी संशय की गाँठ पड़ जाती है।
5. 'निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय' कह कर कवि ने क्या शिक्षा दी है?
उत्तर- इस कथन के द्वारा कवि ने लोगों को व्यवहार-कुशल बनने की शिक्षा देते हुए कहा है कि अपने मन का दुखदर्द मन में छिपाकर रखना चाहिए क्योंकि लोग किसी का दुखदर्द नहीं बाँटते हैं अपितु दूसरों को दुखी देखकर मन ही मन प्रसन्न होते हैं। . रहीम ने एक दोहे में सागर की अपेक्षा कीचड़युक्त जल को अधिक उपयोगी बताया है।
6. आपके विचार से कौन-सा जल अधिक उपयोगी है और क्यों?
अथवा
रहीम के अनुसार कौन-सा जल अधिक उपयोगी होता है?
उत्तर - रहीम के अनुसार जिस जल में प्राणी की प्यास बुझाने की क्षमता हो, वही जल उपयोगी होता है। छोटे-से पोखर का कीचड़युक्त जल पीकर छोटे-छोटे जीव-जंतु अपनी प्राण-रक्षा करते हैं, अतः वह गंदा पानी भी सागर की अथाह जलराशि की अपेक्षा कहीं अधिक उपयोगी होता है। सागर का जल अपने खारेपन के कारण किसी की प्यास नहीं बुझा पाता है।
7. रहीम ने पशुओं से भी अधिक गया-गुजरा हुआ किसे कहा है?
उत्तर - रहीम ने उन लोगों को पशुओं से भी अधिक गया-गुजरा हुआ माना है. जो अपने कृपण स्वभाव के कारण प्रसन्न होने पर भी किसी को कुछ नहीं देते हैं।
7. पौधों को सींचते समय उसके किस भाग पर विशेष ध्यान देना चाहिए और क्यों?
उत्तर- पौधों को सींचते समय उसके जड़ की सिंचाई भली-भाँति करनी चाहिए क्योंकि जड़ को सींचने से ही फलों और फूलों में पौधे का जीवन-रस पहुँच जाता है।
8. 'रहीम के नीतिपरक दोहे, सरल, स्वाभाविक और दृष्टांतों से युक्त हैं।'
इस कथन के आलोक में रहीम के दोहों की विशेषताएँ लिखिए।
अथवा
रहीम के नीतिपरक दोहों की क्या विशेषताएँ है?
उत्तर - रहीम के इन संकलित दोहों की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि ये दोहे सरल, मन को छू लेने वाले, दैनिक जीवन के आचरण और व्यवहार से संबंधित और सहज बोधगम्य हैं। ये दोहे जहाँ एक ओर पाठक को औरों के साथ उचित व्यवहार करने की शिक्षा देते हैं, वहीं मानव मात्र को करने योग्य और न करने योग्य आचरण की भी शिक्षा देते हैं। दोहों की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और दृष्टांतों से युक्त है। बड़े ही सरल और स्वाभाविक उदाहरणों के द्वारा कवि ने नीति की बातों को पुष्ट किया है। लोक-व्यवहार में कुशलता एवं जीवन में सुख-शांति प्राप्त करने के लिए रहीम के ये दोहे प्रत्येक व्यक्ति हेतु नितांत उपयोगी हैं।
9. 'रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय' से रहीम ने लोगों को क्या समझाने का प्रयास किया है?
उत्तर - इस लोक प्रसिद्ध उक्ति के माध्यम से रहीम ने लोगों को यह समझाने का प्रयास किया है कि एक बार जो बात बिगड़ जाती है वह लाख कोशिश करने पर भी नहीं बन पाती। जिस प्रकार दूध के फट जाने पर उसे बार-बार मथने पर भी उससे मक्खन नहीं निकलता, उसी प्रकार बिगड़ी हुई बात को सुधारने का प्रयास व्यर्थ हो जाता है।
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता ?
उत्तर - प्रेम आपसी विश्वास, लगाव एवं स्नेह का प्रतीक होता है। इस प्रेमपूर्ण संबंध की डोर यदि एक बार टूट जाती है तो उसमें पहले जैसी सरसता और अपनापन नहीं रह जाता और मन में दरार पड़ जाती है। जिस प्रकार धागे को जोड़ने की कोशिश में धागे में गाँठ पड़ जाती है, उसकी समरसता नष्ट हो जाती है, उसी प्रकार प्रेमपूर्ण संबंधों की डोरी टूटने पर उसमें संशय की गाँठ पड़ जाती है।
(ख) हमें अपना दुख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है?
उत्तर - हमें अपना दुख दूसरों के सामने इसलिए नहीं प्रकट करना चाहिए क्योंकि दूसरे लोग हमारे दुख की बात सुनकर मन ही मन प्रसन्न होते हैं। कोई किसी का दुख-दर्द नहीं बाँटता है। दूसरे लोग दुखदर्द की बात सुनकर उसका मज़ाक उड़ाते हैं, सच्ची सहानुभूति कोई नहीं जताता है।
(ग) रहीम ने सागर की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है?
उत्तर - रहीम ने पंक-जल को धन्य इसलिए कहा है क्योंकि उस कीचड़ युक्त जल को पीकर कई कीट-पतंगे और लघु प्राणी अपनी प्यास बुझा लेते है। परंतु सागर का खारा पानी किसी की प्यास नहीं बुझाता। दूसरे प्राणियों की प्यास बुझाकर जीवन-रक्षा करने के कारण कवि ने पंक-जल को अथाह जलराशि संपन्न सागर के जल की अपेक्षा धन्य माना है।
(घ) एक को साधने से सब कैसे सध जाता है ?
उत्तर - एक ही परमात्मा को साधने से अर्थात निष्ठापूर्वक ध्यान करने से जीवन के सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं क्योंकि परमात्मा ही जीवन का मूल आधार है। जिस प्रकार जड़ को सींचने से फल-फूल-पत्तियाँ स्वयं विकसित होने लगते हैं, उसी प्रकार जीवन के आधारभूत सत्य परमात्मा के चिंतन-मनन और ध्यान से जीवन के सभी कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होते हैं। आशय यह है कि एक मुख्य कार्य की सिद्धि से व्यक्ति के सभी कार्य स्वतः सिद्ध हो जाते हैं।
(ङ) जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता ?
उत्तर - जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी नहीं कर पाता, क्योंकि जल ही कमल की मूल संपत्ति है। जल कमल को जीवित रखता है। यही वह आंतरिक और अनिवार्य शक्ति है जो कमल-पुष्प को विकसित करती है। सूर्य की किरणें अपनी गर्मी से कमल की पंखुडियों को खोलकर उसे खिला देती है परंतु उन पंखुडियों में सुंदरता, तरलता, कोमलता और सुगंध का संचार जल ही करता है। अतएव जलहीन सरोवर में कमल नहीं खिल सकता।
(च) अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा?
उत्तर - अवध नरेश श्री रामचंद्र जी ने माता-पिता की आज्ञा से चौदह वर्ष का वनवास काटने के लिए अयोध्या से प्रस्थान किया था। चित्रकूट में आकर उन्होंने वनवास के कुछ दिन व्यतीत किए। यहाँ पर उन्हें शांति प्राप्त हुई और यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य से आकर्षित होकर वे यहाँ पर रम गए।
(छ) नट किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है?
उत्तर - नट अपने शरीर को गोलाकार आकृति में समेटकर, कुंडली मारकर खंभे के ऊपर चढ़ जाता है। इस प्रकार वह अपने शरीर को गोलाकार आकृति में समेटने और कुंडली मारकर ऊपर चढ़ने की कला में सिद्धहस्त होता है।
(ज) मोती, मानुष, चून के संदर्भ में पानी के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - मोती के संदर्भ में पानी का अर्थ है चमक, मानुष के संदर्भ में आत्मसम्मान और चून के संदर्भ में पानी आटा गूँधने के काम आता है। कवि का कहना है कि पानी के बिना मोती पर चमक नहीं आती है और चमक न होने से मोती का कोई मूल्य नहीं होता। उसी प्रकार पानी रूपी आत्मसम्मान के बिना मनुष्य का भी कोई मोल नहीं होता है। पानी के अभाव में आटा गूँध कर रोटी नहीं बनाई जा सकती, इसलिए मोती, मानुष, चून के संदर्भ में पानी का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है।
2. निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।
उत्तर - इस पंक्ति से यह भाव स्पष्ट होता है कि आपसी प्रेमपूर्ण संबंध यदि एक बार टूट जाते हैं तो दुबारा जोड़ने पर उनमें पहले जैसी सरसता नहीं आती है। मन में संदेह की गाँठ पड़ जाती है। ठीक उसी प्रकार, जैसे कि टूटे हुए धागे को पुनः जोड़ने से उसमें गाँठ पड़ जाती है।
(ख) सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय।
उत्तर - इस पंक्ति से यह भाव स्पष्ट होता है कि लोग दूसरों के दुख दर्द को सुनकर मन ही मन प्रसन्न होते हैं, कोई किसी का दुख दर्द नहीं बाँटता। इसलिए अपने मन की पीड़ा को, दुखदर्द को अपने मन में ही छिपाकर रखना चाहिए।
(ग) रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै-फलै अघाय ।
उत्तर - इस पंक्ति से रहीम दास जी यह कहना चाहते हैं कि किसी वृक्ष या पौधे के जड़ को भली भाँति सींचने से फूल और फल स्वयं ही विकसित होने लगते हैं। जड़ से ही उन्हें सार तत्व मिल जाता है। इसी प्रकार यदि मनुष्य सच्चे मन से एक ही परमात्मा का ध्यान कर ले तो उसे संसार के सारे सुख स्वयं ही प्राप्त हो जाते हैं।
(घ) दीरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं ।
उत्तर - इस पंक्ति के द्वारा कवि दोहा छंद की विशेषता बताते हुए कह रहे हैं कि दोहे में शब्द तो बहुत कम होते हैं परंतु उन शब्दों में गहन अर्थ छिपा होता है। देखने में छोटे और सरल प्रतीत होने वाले दोहे अपने में व्यापक और गंभीर अर्थ को समेटे हुए होते हैं।
(ङ) नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ।
उत्तर - इस पंक्ति से कवि यह भाव स्पष्ट करना चाहते हैं कि संगीत की सुमधुर सुर-लहरियों को सुनकर हिरन मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। उस धुन को सुनते हुए अपनी सुध-बुध खोकर शिकारी के जाल में फँसकर अपने प्राण तक न्योछावर कर देते हैं। इसी प्रकार प्रसन्न होने पर मनुष्य प्रेम सहित धन अर्पित कर देता है। प्रसन्नता की स्थिति में व्यक्ति धन आदि देकर अपनी उदारता व्यक्त करता है।
(च) जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।
उत्तर - इस पंक्ति के द्वारा कवि पैनी धार वाले, तलवार और तीखी नोक वाले सुई के प्रयोग और महत्व को स्पष्ट करते हुए कह रहे हैं कि जहाँ सुई काम आती है वहाँ तलवार की कोई उपयोगिता नहीं होती है। इस पंक्ति में यही भाव स्पष्ट होता है कि उपयोगिता की दृष्टि से छोटी-सी सुई का महत्व बड़ी तलवार की अपेक्षा कुछ कम नहीं है। अतः छोटी और बड़ी चीज़ों का अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण स्थान है।
(छ) पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।
उत्तर - इस पंक्ति से यह भाव स्पष्ट होता है कि 'पानी' का जीवन में विशेष महत्व है। 'पानी' अर्थात चमक के बिना मोती की कोई उपयोगिता नहीं होती। 'पानी' अर्थात आत्मसम्मान के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ है। 'पानी' के बिना आटा नहीं गूँधा जा सकता, इसलिए मनुष्य को जीवन में 'पानी' के महत्व को समझना चाहिए।