रहीम के दोहे
रहीम के दोहे अति लघु उत्तरीय प्रश्न 1. कवि रहीम के अनुसार प्रेम के धागे को किस प्रकार नहीं टूटने देना चाहिए? उत्तर- कवि रहीम के अनुसार प्...
Sunday, 30 April 2023
MCQ रघुवीर सहाय (क) वसंत आया
Wednesday, 26 April 2023
दुःख का अधिकार पाठ का सार
पाठ खेल-दिवस प्रश्न उत्तर
पाठ
खेल-दिवस
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
मौखिक -
(क) अभिषेक के मौसा जी ने उपहार में उसे क्या दिया ?
उत्तर- अभिषेक के मौसा जी ने उपहार में उसे 'आई-फोन' दिया।
(ख) सार्थक किस पर खेल खेलता था ?
उत्तर- सार्थक कंप्यूटर पर खेल खेलता था।
(ग) अभिषेक के रोने का क्या कारण था ?
उत्तर- अभिषेक के रोने का कारण था कि वह इस वर्ष विद्यालय में होने वाली प्रतियोगिता के लिए किसी भी खेल में नहीं चुना गया।
(घ) सभी बच्चे उदास क्यों थे ?
उत्तर- किसी भी खेल प्रतियोगिता में न चुने जाने पर सभी बच्चे उदास थे।
लिखित-
कुछ शब्दों में
(क) सार्थक ने अभिषेक से क्या कहा ?
उत्तर- सार्थक ने अभिषेक से कहा कि तुम्हें तो पिछले वर्ष सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार मिला था और तुम तो इस बार भी जीतोगे।
(ख) अभिषेक के डर का क्या कारण था ?
उत्तर- अभिषेक के डर का कारण यह था कि वह अब खेल के मैदान में खेलने का अभ्यास नहीं कर रहा था।
(ग) अभिषेक को रोते देखकर अध्यापिका जी ने क्या किया ?
उत्तर- अभिषेक को रोते देखकर अध्यापिका जो ने उसके रोने और हारने का कारण पूछा तथा उसे मैदान में खेले जाने वाले खेलों का महत्त्व समझाया।
(घ) स्वास्थ्य और प्रेरणा प्राप्त करने के लिए क्या आवश्यक है ?
उत्तर- स्वास्थ्य एवं प्रेरणा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन खेलना आवश्यक है। इससे हमें अच्छा स्वास्थ्य, खेल भावना, परस्पर सहयोग, सहनशीलता, उत्साह और प्रतिस्पर्धा संबंधी सीख मिलती है।
(ङ) खेल का नाम सुनते ही हमारी आँखों के सामने कौन-सी तस्वीर उभरती है ?
उत्तर- खेल का नाम सुनते ही हमारी आँखों के सामने मैदान में पसीना बहाते और जी-जान लगाकर अपने प्रतिद्वंदी को पछाड़ते खिलाड़ियों की तस्वीर उभरती है।
ज़्यादा शब्दों में-
(क) अध्यापिका सुमन ने चुनाव के लिए किन-किन खेलों को शामिल किया ?
उत्तर- अध्यापिका सुमन ने चुनाव के लिए दो सौ मीटर की दौड़, लंबीकूद, ऊँची कूद, रस्सी कूद, बाधा दौड़ और गोला फेंक आदि खेलों को शामिल किया।
(ख) आजकल के बच्चे खेल के लिए किन-किन उपकरणों का प्रयोग करते हैं ?
उत्तर- आजकल के बच्चे खेलने के लिए इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स का प्रयोग करते हैं; जैसे- वीडियो गेम, प्लेस्टेशन, कंप्यूटर और मोबाइल आदि।
(ग) मैदान में खेलों के माध्यम से हम क्या-क्या सीखते हैं ?
उत्तर- मैदान में खेलों के माध्यम से हम खेल-भावना, पारस्परिक सहयोग, सहनशीलता, उत्साह तथा प्रतिस्पर्धा को सीखते हैं। खेल हमें तन-मन से स्वस्थ रखते हैं तथा मोटापा, तनाव, अकेलापन आदि से बचाते हैं।
(घ) इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर खेलने से क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर- इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स पर खेलने से सिर दर्द, तनाव, सुस्ती, अकेलापन, मोटापा तथा कम उम्र में आँखों पर चश्मा लग जाना आदि हानियाँ हैं। कुल मिलाकर इनसे हमारा स्वास्थ्य पूर्णतया दुष्प्रभावित होता है।
(ङ) बच्चों ने अध्यापिका से क्या कहा ?
उत्तर- बच्चों ने अध्यापिका से कहा कि अब हम टी०वी०, मोबाइल और प्लेस्टेशन पर न खेलकर मैदान में ही पसीना बहाएँगे और स्वास्थ्य एवं खुशियाँ पाएँगे। अगले साल आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में अवश्य ही प्रथम आएँगे।
Sunday, 9 April 2023
class 12 विष्णु खरे
Saturday, 8 April 2023
साखी (कबीर) class 10
साखी (कबीर) पाठ का भावार्थ प्रस्तुत साखियाँ कबीरदास जी द्वारा रचित हैं । इन साखियों में कबीर ने विभिन्न विषयों पर अपने विचारों को सुंदर ढंग से अभिव्यक्त किया है। कबीर फक्कड़, मस्तमौला और क्रांतिदर्शी कवि थे। उन्होंने अपनी पैनी नज़र और वाणी से बाह्य आडंबर पर तीखी चोट की है। अपने अनुभवजन्य ज्ञान को 'साक्षी' में प्रत्यक्ष करते हुए कबीर जीवन के परमोपयोगी और आवश्यक तथ्यों का ज्ञान देते हैं। • पहले दोहे में संयमित और मधुर वाणी के प्रयोग की आवश्यकता पर बल देना ही कवि का उद्देश्य है।इस दोहे में उन्होंने बताया है कि कड़वी वाणी से दूसरों को दुःख होता हैं। अतः दूसरों को सुख पहुँचाने वाली व अपने मन को भी शीतलता पहुँचाने वाली मीठी वाणी बोलनी चाहिए। • दूसरे दोहे में मृग और उसकी नाभि में स्थित कस्तूरी का उदाहरण देते हुए यह बताया गया है कि नाभि में कस्तूरी होने पर भी बाहर उसकी खुशबू से प्रभावित होकर उसे चारों ओर ढूँढ़ता है, उसी प्रकार प्रत्येक मन में राम का वास है, उसके लिए इधर-उधर भागना व्यर्थ है। ईश्वर तो हमारे अंतःकरण में ही निवास करते हैं। • तीसरे दोहे में अहंकार को ईश्वर की भक्ति व उसकी प्राप्ति में बाधक बताया गया है। ज्ञान रूपी दीपक का प्रकाश प्राप्त होते ही अहंकार व मोह का अंधकार समाप्त हो जाता है। • चौथे दोहे में कहा गया है कि खाने और सोने को जीवन का सबसे बड़ा सुख मानकर सारा संसार खुश है। वह इनके सुखों में इवा हुआ है जबकि मोहमाया की नींद त्याग कर ज्ञान प्राप्त होने पर कबीर देखते हैं कि मरणशील मनुष्य इस क्षणभंगुर संसार में राम-विमुख होकर राम को भूल गया है। मनुष्य जीवन की गरिमा को नहीं समझते हैं इसलिए मनुष्य के अनमोल जीवन को नष्ट होते देखकर कबीर दुखी हो रहे हैं। • पाँचवें दोहे में कहा गया है कि विरह पीड़ा विष से भी घातक है। राम से प्रेम करनेवाला उसके विरह में जीवित नहीं बचता है यदि बच भी जाता है तो पागल हो जाता है। • छठे दोहे में कहा गया है कि अपने दोषों को बतानेवाले, देखनेवाले को आदर सहित अपने पास रखना चाहिए। इनकी आलोचना एक सच्चे हितचितक की भाँति हमारे स्वभाव के सभी दोषों व बुराइयों को बिना साबुन तथा पानी के ही दूर कर हमारे मन को निर्मल कर हमारा भला करती है। • सातवें दोहे में बताया गया है कि जिसे ईश्वर प्रेम की लगन लग जाती है वही सच्चा पंडित कहलाता है। शास्त्र व वेद पढ़ने से कोई विद्वान नहीं बनता। • आठवें दोहे में भगवद्ज्ञान से युक्त होकर कवि ने दूसरों को भी भगवद्भक्ति में रंग जाने के लिए प्रेरित किया है। भगवान की प्राप्ति होने पर भक्त व संत सब ओर प्रेम-ही-प्रेम की खुशबू फैलते हैं। |
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