HINDI BLOG : April 2023

रहीम के दोहे

रहीम के दोहे  अति लघु उत्तरीय प्रश्न 1. कवि रहीम के अनुसार प्रेम के धागे को किस प्रकार नहीं टूटने देना चाहिए? उत्तर-  कवि रहीम के अनुसार प्...

Sunday, 30 April 2023

MCQ रघुवीर सहाय (क) वसंत आया

                                         3. रघुवीर सहाय
                                          (क) वसंत आया 

जैसे बहन 'दा' कहती है 
ऐसे किसी बँगले के किसी तरु (अशोक ?) पर कोई चिड़िया कुऊकी 
चलती सड़क के किनारे लाल बजरी पर चुरमुराए पाँव तले
ऊँचे तरुवर से गिरे
बड़े-बड़े पियराए पत्ते 
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो-
खिली हुई दवा आई. फिरको-सी आई, चली गई।
ऐसे, फुटपाथ पर चलते चलते चलते।
कल मैंने जाना कि वसंत आया। 
1. प्रस्तुत काव्यांश किस कविता से अवतरित है ?
(क) सत्य
(ख) वसंत आया
(ग) तोड़ो
(घ) तरुवर
उत्तर- (ख) वसंत आया

2. इस ऋतु में चिड़िया कहाँ कुहुकती है ?
(क) अशोक वृक्ष पर 
(ख) बगीचे में
(ग) सड़क पर
(घ) बजरी पर 
उत्तर- (क) अशोक वृक्ष पर 

3. 'पियराए' शब्द कैसा है ?
(क) तत्सम 
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर- (ग) देशज

4. 'सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो' में किस अलंकार का प्रयोग है ?
(क) मानवीकरण 
(ख) उपमा
(ग) रूपक
(घ) अतिशयोक्ति
उत्तर- (क) मानवीकरण 

5. कवि ने कैसे जाना कि वसंत आ गया है ?
(क) पत्तों के गिरने से 
(ख) फुटपाथ पर चलते-चलते 
(ग) लाल बजरी से
(घ) धूप से
उत्त्तर- (ख) फुटपाथ पर चलते-चलते 

Wednesday, 26 April 2023

दुःख का अधिकार पाठ का सार

                         दुःख का अधिकार
                                                                                                               यशपाल 
पाठ का सार
‘दु:ख का अधिकार' एक व्यंग्यपूर्ण रचना है। इसमें इस बात पर दुःख प्रकट किया गया है कि लोग गरीबों के दुःख का दुःख नहीं समझते। हमारे देश में कुछ अभागे लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें दुःख मनाने का भी अधिकार नहीं है।
पोशाक द्वारा स्तर निर्धारण हमारे समाज में हमारी पोशाक देखकर हमारा स्तर निर्धारित किया जाता है। मनुष्य को पहचान उसकी पोशाक से होती है। यहाँ पोशाक उसे अधिकार व दर्जा दिलाती है। कीमती पोशाक अनेक बंद दरवा खोल देता है। जीवन में कभी-कभी ऐसे क्षण भी आते हैं जब हम अपने वर्ग-भेद से झुककर गरीबों की मनोस्थिति को भी आँकते हैं? उन निचली श्रेणियों की अनुभूति मन को छूती है, परंतु पोशाक बंधन बनकर अड़चन डाल देती है। खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुकने से रोके रहती है।
लोगों का दुर्व्यवहार- खरबूजे बेचनेवाली घुटनों में मुँह छिपाकर डलिया में कुछ खरबूजे रखकर रो रही थी। उसको को देखकर कोई भी खरबूजे खरीदने के लिए आगे नहीं बढ़ रहा था। बाजार में खड़े लोग उसे धिक्कार रहे थे तथा तरह-तरह की बातें बना रहे थे। वे कह रहे थे कि सूतक लगे हुए हैं। एक आदमी ने घृणा से थूकते हुए कहा, "क्या खमाना है। जवान लड़के को मरे पूरा दिन नहीं बीता और यह बेहया दुकान लगा के बैठी है।" एक ने लापरवाही से कहा कि इन कमीनों का धर्म-ईमान कुछ नहीं बस रोटी का टुकड़ा ही सब कुछ है। परचून की दुकान चलानेवाले एक दुकानदार ने कहा- "इसे अपने धर्म-ईमान की चिंता नहीं है तो न सही परंतु इसे सूतक के तेरह दिनों में खरबूजे बेचकर दूसरों का धर्म-ईमान नहीं बिगाड़ना चाहिए।" बुढ़िया माँ की समस्या-लेखक ने पास-पड़ोस की दुकानों से पूछकर पता लगाया कि उसका 23 साल का लड़का भगवाना साँप के काटने से मर गया। वह शहर के पास डेढ़ बीघा समीन में खेती करके, परिवार का निर्वाह करता था। परसों सवेरे एक साँप ने उसे डस लिया। माँ ने ओझा को बुलाया। झाड़ना-फूँकना हुआ। नागदेव की पूजा की। दान-दक्षिणा दी । घर में जो अनाज और आटा था, वह दान-दक्षिणा में चला गया परंतु उसका पुत्र भगवाना बच न सका। सुबह होते ही बच्चे भूख से बिलबिलाने लगे। दादी ने उन्हें खाने के लिए खरबूजे दिए। वह बुखार से तप रही थी। कोई उधार देनेवाला नहीं था इसलिए वह रोते-रोते खरबूजे लेकर बेचने चल पड़ी थी। वहीं हमारे पड़ोस की एक संभ्रांत महिला पुत्र की मृत्यु के बाद अढ़ाई मास तक पलंग से उठ न सकी थी। उन्हें पह-पंद्रह मिनट बाद पुत्र-वियोग में मूर्छा आ जाती थी और मूर्छा न आने की अवस्था में आँखों से आँसू न रुकते थे। दो- दो डॉक्टर हरदम सिरहाने बैठे रहते थे। हरदम सिर पर बर्फ रखी जाती थी, शहर भर के लोगों के मन उस पुत्रः वियोगी माँ के लिए द्रवित हो उठे थे।
लेखक दोनों पुत्र-वियोगिनी माताओं की तुलना कर रहा था। उसके मन में विचार आया कि शोक करने और दुःख मनाने के लिए भी सुविधा और अधिकार दोनों चाहिए।





पाठ खेल-दिवस प्रश्न उत्तर

  पाठ

                                                          खेल-दिवस 

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -

मौखिक -

(क) अभिषेक के मौसा जी ने उपहार में उसे क्या दिया ?

उत्तर- अभिषेक के मौसा जी ने उपहार में उसे 'आई-फोन' दिया।


(ख) सार्थक किस पर खेल खेलता था ?

उत्तर- सार्थक कंप्यूटर पर खेल खेलता था। 


(ग) अभिषेक के रोने का क्या कारण था ?

उत्तर- अभिषेक के रोने का कारण था कि वह इस वर्ष विद्यालय में होने वाली प्रतियोगिता के लिए किसी भी खेल में नहीं चुना गया। 


(घ) सभी बच्चे उदास क्यों थे ?

उत्तर- किसी भी खेल प्रतियोगिता में न चुने जाने पर सभी बच्चे उदास थे।


लिखित-

कुछ शब्दों में 

(क) सार्थक ने अभिषेक से क्या कहा ?

उत्तर- सार्थक ने अभिषेक से कहा कि तुम्हें तो पिछले वर्ष सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार मिला था और तुम तो इस बार भी जीतोगे। 


(ख) अभिषेक के डर का क्या कारण था ?

उत्तर- अभिषेक के डर का कारण यह था कि वह अब खेल के मैदान में खेलने का अभ्यास नहीं कर रहा था। 


(ग) अभिषेक को रोते देखकर अध्यापिका जी ने क्या किया ?

उत्तर- अभिषेक को रोते देखकर अध्यापिका जो ने उसके रोने और हारने का कारण पूछा तथा उसे मैदान में खेले जाने वाले खेलों का महत्त्व समझाया।


(घ) स्वास्थ्य और प्रेरणा प्राप्त करने के लिए क्या आवश्यक है ?

उत्तर- स्वास्थ्य एवं प्रेरणा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन खेलना आवश्यक है। इससे हमें अच्छा स्वास्थ्य, खेल भावना, परस्पर सहयोग, सहनशीलता, उत्साह और प्रतिस्पर्धा संबंधी सीख मिलती है।


(ङ) खेल का नाम सुनते ही हमारी आँखों के सामने कौन-सी तस्वीर उभरती है ?

उत्तर- खेल का नाम सुनते ही हमारी आँखों के सामने मैदान में पसीना बहाते और जी-जान लगाकर अपने प्रतिद्वंदी को पछाड़ते खिलाड़ियों की तस्वीर उभरती है। 


ज़्यादा शब्दों में- 

(क) अध्यापिका सुमन ने चुनाव के लिए किन-किन खेलों को शामिल किया ?

उत्तर- अध्यापिका सुमन ने चुनाव के लिए दो सौ मीटर की दौड़, लंबीकूद, ऊँची कूद, रस्सी कूद, बाधा दौड़ और गोला फेंक आदि खेलों को शामिल किया।


(ख) आजकल के बच्चे खेल के लिए किन-किन उपकरणों का प्रयोग करते हैं ?

उत्तर- आजकल के बच्चे खेलने के लिए इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स का प्रयोग करते हैं; जैसे- वीडियो गेम, प्लेस्टेशन, कंप्यूटर और मोबाइल आदि।


(ग) मैदान में खेलों के माध्यम से हम क्या-क्या सीखते हैं ?

उत्तर- मैदान में खेलों के माध्यम से हम खेल-भावना, पारस्परिक सहयोग, सहनशीलता, उत्साह तथा प्रतिस्पर्धा को सीखते हैं। खेल हमें तन-मन से स्वस्थ रखते हैं तथा मोटापा, तनाव, अकेलापन आदि से बचाते हैं। 


(घ) इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर खेलने से क्या हानियाँ  हैं ?

उत्तर- इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स पर खेलने से सिर दर्द, तनाव, सुस्ती, अकेलापन, मोटापा तथा कम उम्र में आँखों पर चश्मा लग जाना आदि हानियाँ हैं। कुल मिलाकर इनसे हमारा स्वास्थ्य पूर्णतया दुष्प्रभावित होता है। 


(ङ) बच्चों ने अध्यापिका से क्या कहा ?

उत्तर- बच्चों ने अध्यापिका से कहा कि अब हम टी०वी०, मोबाइल और प्लेस्टेशन पर न खेलकर मैदान में ही पसीना बहाएँगे और स्वास्थ्य एवं खुशियाँ पाएँगे। अगले साल आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में अवश्य ही प्रथम आएँगे।



Sunday, 9 April 2023

class 12 विष्णु खरे

विष्णु खरे

(क) एक कम

1. 1947 के बाद से
इतने लोगों को इतने तरीकों से आत्मनिर्भर 
मालामाल और गतिशील होते देखा है
    कि अब जब आगे कोई हाथ फैलाता है
    पच्चीस पैसे एक चाय या दो रोटी के लिए मेरे सामने एक ईमानदार आदमी औरत या बच्चा खड़ा है
   तो जान लेता हूँ
   मेरे सामने एक ईमानदार आदमी, औरत या बच्चा खड़ा है 
   मानता हुआ कि हाँ मैं लाचार हूँ कंगाल या कोढ़ी 
  या मैं भला-चंगा हूँ और कामचोर और
  एक मामूली धोखेबाज़ 
  लेकिन पूरी तरह तुम्हारे संकोच लज्जा परेशानी या गुस्से पर आश्रित
  तुम्हारे सामने बिलकुल नंगा निर्लज्ज और निराकांक्षी 
  मैंने अपने को हटा लिया है हर होड़ से
  मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वंद्वी या हिस्सेदार नहीं
  मुझे कुछ देकर या न देकर भी तुम
  कम से कम एक आदमी से तो निश्चित रह सकते हो। 
1. यह काव्यांश किस कविता से अवतरित है ?
  (क) एक कम  
  (ख) सत्य
  (ग) 1947 के बाद
  (घ) लोग
उत्तर: (क) एक कम  
2. 1947 के बाद कवि ने लोगों को क्या होते देखा ?
(क) आत्मनिर्भर
(ख) मालामाल
(ग) गतिशील
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (घ) उपर्युक्त सभी
13. पच्चीस पैसे के लिए हाथ फैलाने वाले व्यक्ति के बारे में कवि क्या जान लेता है ?
(क) वह ईमानदार है। 
(ख) वह बेईमानी है। 
(ग) वह भिखारी है।
(घ) वह कामचोर है
उत्तर : (क) वह ईमानदार है। 
4. हाथ फैलानेवाला को कैसा मानता है ?
(क) लाचार
(ख) कंगाल
(ग) कोढ़ी
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (घ) उपर्युक्त सभी
5. भिखारी सामने वाले का क्या नहीं है ? (ख) प्रतिद्वंद्वी
(क) विरोधी
(ख) प्रतिद्वंद्वी
(ग) हिस्सेदार
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर : (घ) उपर्युक्त सभी



(ख) सत्य 

1. हम कह नहीं सकते
   न  तो हममें कोई स्फुरण हुआ और न ही कोई ज्वर
   किंतु शेष सारे जीवन हम सोचते रह जाते हैं 
   कैसे जानें कि सत्य का वह प्रतिबिंब हममें समाया या नहीं
   हमारी आत्मा में जो कभी-कभी दमक उठता है
   क्या वह उसी की छुअन है
   जैसे
   विदुर कहना चाहते तो वहीं बता सकते थे 
   सोचा होगा माथे के साथ अपना मुकुट नीचा किए
   युधिष्ठिर ने 
   खांडवप्रस्थ से इंद्रप्रस्थ लौटते हुए।
1. यह काव्याश किस कविता से अवतरित है ?
(क) सत्य
(ख) बनारस
(ग) युधिष्ठिर
(घ) एक कम
उत्तर: (क) सत्य
2. इस कविता के रचयिता कौन है ?
(क) विष्णु खरे 
(ख) प्रीति खरे
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) रघुवीर सहाय
उत्तर: (क) विष्णु खरे 
3. सत्य की क्या अनुभूति हुई ?
(क) वह आया
(ख) कँपकँपी  हुई
(ग) ज्वर हुआ
(घ) कुछ नहीं
उत्तर: (घ) कुछ नहीं
4. 'कभी-कभी' में किस अलंकार का प्रयोग है ?
(क) दृष्टांत 
(ख) पुनरुक्ति
(ग) अनुप्रास
(घ) यमक
उत्तर: (ख) पुनरुक्ति
5. इस काव्यांश की भाषा क्या है ?
(क) खड़ी बोली
(ख) ब्रज 
(ग) अवधी
(घ) भोजपुरी
उत्तर:  (क) खड़ी बोली

2. जैसे शमी वृक्ष के तने से टिककर
     न पहचानने में पहचानते हुए विदुर ने धर्मराज को 
     निर्निमेष देखा था अंतिम बार
    और उनमें से उनका आलोक धीरे-धीरे आगे बढ़कर
    मिल गया था युधिष्ठिर में 
    सिर झुकाए निराश लौटते हैं हम
    कि सत्य अंत तक हमसे कुछ नहीं बोला
   हाँ हमने उसके आकार से निकलता वह प्रकाश-पुंज देखा था
   हम तक आता हुआ
  वह हममें विलीन हुआ या हमसे होता हुआ आगे बढ़ गया।
1. यह काव्यांश किस कविता से अवतरित है ?
   (क) सत्य 
   (ख) तोड़ो
   (ग) वसंत आया
   (घ) शमी वृक्ष
उत्तर:   (क) सत्य 
2. शमी वृक्ष के तने से कौन टिका था ?
  (क) युधिष्ठिर 
  (ख) विदुर
   (ग) अर्जुन
   (घ) भीम
उत्तर :   (ख) विदुर
3. आलोक किसमें मिल गया ?
    (क) युधिष्ठिर में 
    (ख) विदुर में
    (ग) वृक्ष में
    (घ) तने में
उत्तर:  (क) युधिष्ठिर में 
4. हम किस अवस्था में लौटते हैं ?
    (क) निराशावस्था में
    (ख) सिर झुकाए
    (ग) (क)- (ख) दोनों
    (घ) सामान्य
उत्तर:   (ग) (क)- (ख) दोनों
5. 'धीरे-धीरे' में कौन-सा अलंकार है ?
(क) पुनरुक्ति प्रकाश 
(ख) यमक 
(ग) श्लेष
(घ) उपमा
उत्तर: (क) पुनरुक्ति प्रकाश 




Saturday, 8 April 2023

साखी (कबीर) class 10


 साखी   (कबीर) 


पाठ का भावार्थ


   प्रस्तुत साखियाँ कबीरदास जी द्वारा रचित हैं । इन साखियों में कबीर ने विभिन्न विषयों पर अपने विचारों को सुंदर ढंग से अभिव्यक्त किया है। कबीर फक्कड़, मस्तमौला और क्रांतिदर्शी कवि थे। उन्होंने अपनी पैनी नज़र और वाणी से बाह्य आडंबर पर तीखी चोट की है। अपने अनुभवजन्य ज्ञान को 'साक्षी' में प्रत्यक्ष करते हुए कबीर जीवन के परमोपयोगी और आवश्यक तथ्यों का ज्ञान देते हैं।


 • पहले दोहे में संयमित और मधुर वाणी के प्रयोग की आवश्यकता पर बल देना  ही कवि का उद्देश्य है।इस दोहे में उन्होंने बताया है कि कड़वी वाणी से दूसरों को दुःख होता हैं। अतः दूसरों को सुख पहुँचाने वाली व अपने मन को भी शीतलता पहुँचाने वाली मीठी वाणी बोलनी चाहिए। 


 • दूसरे दोहे में मृग और उसकी नाभि में स्थित कस्तूरी का उदाहरण देते हुए यह बताया गया है कि नाभि में कस्तूरी होने पर भी बाहर उसकी खुशबू से प्रभावित होकर उसे चारों ओर ढूँढ़ता है, उसी प्रकार प्रत्येक मन में राम का वास है, उसके लिए इधर-उधर भागना व्यर्थ है। ईश्वर तो हमारे अंतःकरण में ही निवास करते हैं। 


• तीसरे दोहे में अहंकार को ईश्वर की भक्ति व उसकी प्राप्ति में बाधक बताया गया है। ज्ञान रूपी दीपक का प्रकाश प्राप्त होते ही अहंकार व मोह का अंधकार समाप्त हो जाता है।


• चौथे दोहे में कहा गया है कि खाने और सोने को जीवन का सबसे बड़ा सुख मानकर सारा संसार खुश है। वह इनके सुखों में इवा हुआ है जबकि मोहमाया की नींद त्याग कर ज्ञान प्राप्त होने पर कबीर देखते हैं कि मरणशील मनुष्य इस क्षणभंगुर संसार में राम-विमुख होकर राम को भूल गया है। मनुष्य जीवन की गरिमा को नहीं समझते हैं इसलिए मनुष्य के अनमोल जीवन को नष्ट होते देखकर कबीर दुखी हो रहे हैं। 


• पाँचवें दोहे में कहा गया है कि विरह पीड़ा विष से भी घातक है। राम से प्रेम करनेवाला उसके विरह में जीवित नहीं बचता है यदि बच भी जाता है तो पागल हो जाता है। 


• छठे दोहे में कहा गया है कि अपने दोषों को बतानेवाले, देखनेवाले को आदर सहित अपने पास रखना चाहिए। इनकी आलोचना एक सच्चे हितचितक की भाँति हमारे स्वभाव के सभी दोषों व बुराइयों को बिना साबुन तथा पानी के ही दूर कर हमारे मन को निर्मल कर हमारा भला करती है।

• सातवें दोहे में बताया गया है कि जिसे ईश्वर प्रेम की लगन लग जाती है वही सच्चा पंडित कहलाता है। शास्त्र व वेद पढ़ने से कोई विद्वान नहीं बनता।


• आठवें दोहे में भगवद्ज्ञान से युक्त होकर कवि ने दूसरों को भी भगवद्भक्ति में रंग जाने के लिए प्रेरित किया है। भगवान की प्राप्ति होने पर भक्त व संत सब ओर प्रेम-ही-प्रेम की खुशबू फैलते हैं।