3. रघुवीर सहाय
(क) वसंत आया
जैसे बहन 'दा' कहती है
ऐसे किसी बँगले के किसी तरु (अशोक ?) पर कोई चिड़िया कुऊकी
चलती सड़क के किनारे लाल बजरी पर चुरमुराए पाँव तले
ऊँचे तरुवर से गिरे
बड़े-बड़े पियराए पत्ते
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो-
खिली हुई दवा आई. फिरको-सी आई, चली गई।
ऐसे, फुटपाथ पर चलते चलते चलते।
कल मैंने जाना कि वसंत आया।
1. प्रस्तुत काव्यांश किस कविता से अवतरित है ?
(क) सत्य
(ख) वसंत आया
(ग) तोड़ो
(घ) तरुवर
उत्तर- (ख) वसंत आया
2. इस ऋतु में चिड़िया कहाँ कुहुकती है ?
(क) अशोक वृक्ष पर
(ख) बगीचे में
(ग) सड़क पर
(घ) बजरी पर
उत्तर- (क) अशोक वृक्ष पर
3. 'पियराए' शब्द कैसा है ?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर- (ग) देशज
4. 'सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो' में किस अलंकार का प्रयोग है ?
(क) मानवीकरण
(ख) उपमा
(ग) रूपक
(घ) अतिशयोक्ति
उत्तर- (क) मानवीकरण
5. कवि ने कैसे जाना कि वसंत आ गया है ?
(क) पत्तों के गिरने से
(ख) फुटपाथ पर चलते-चलते
(ग) लाल बजरी से
(घ) धूप से
उत्त्तर- (ख) फुटपाथ पर चलते-चलते
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