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रहीम के दोहे

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Sunday, 14 November 2021

CLASS 10 BDEY BHAI SAHAB MCQ Based On Passages/बड़े भाई साहब-गद्यांशों पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न

I. निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए-
 मैं छोटा था, वह बड़े थे मेरी उम्र नौ साल की थी वह चौदह साल के थे। उन्हें मेरी तम्बीह और निगरानी का पूरा और जन्मसिद्ध अधिकार था और मेरी शालीनता इसी में थी कि उनके हुक्म को कानून समझूँ। वह स्वभाव से बड़े अध्ययनशील थे। हरदम किताब खोले बैठे रहते और शायद दिमाग को आराम देने के लिए कभी कॉपी पर किताब के हाशियों पर, चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों की तस्वीरें बनाया करते थे। कभी-कभी एक ही नाम या शब्द या वाक्य दस-बार लिख डालते। कभी एक शेर को बार-बार सुंदर अक्षरों में नकल करते। कभी ऐसे शब्द-रचना करते, जिसमें न कोई अर्थ होता, न कोई सामंजस्य। मसलन एक बार उनकी कॉपी पर मैंने यह इबारत देखी- स्पेशल, अमीना, भाइयों-भाइयों, दरअसल, भाई-भाई। राधेश्याम, श्रीयुत, राधेश्याम, एक घण्टे तक; इसके बाद एक आदमी का चेहरा बना हुआ था। मैंने बहुत चेष्टा की कि इस पहेली का कोई अर्थ निकालूँ, लेकिन असफल रहा और उनसे पूछने का साहस न हुआ। वह नौवीं जमात में थे, मैं पाँचवी में। उनकी रचनाओं को समझना मेरे लिए छोटा मुँह बड़ी बात थी। 
1.बड़े भाई साहब को तथा लेखक की उम्र में कितने वर्षों का अंतर था ? 
(i) पाँच  
(ii) चौदह
(iii) नौ 
(iv) तीन 
उत्तर-(i) पाँच
2.लेखक और उसके बड़े भाई साहब में कितनी जमात का अंतर था ?
(i) तीन 
(ii) चार
(iii) पाँच 
(iv) छह 
 उत्तर-(ii) चार 
3.हरदम किताबें कौन खोलकर बैठा रहता था ?
(i) लेखक 
(ii) लेखक के बड़े भाई साहब 
(iii) लेखक तथा उसके बड़े भाई साहब  
(iv) उपयुक्त में से कोई नहीं 
उत्तर-(ii) लेखक के बड़े भाई साहब 
4. बड़े भाई साहब स्वभाव से कैसे थे ? 
(i) शरारती 
(ii) अध्ययनशील 
(iii) चंचल 
(iv) उपर्युक्त सभी 
उत्तर-(ii) अध्ययनशील
5.बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे ? 
(i)  कॉपी और किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों बिल्लियों की तस्वीरें बनाते थे। 
(ii) एक ही नाम या शब्द को दस-बीस बार लिखते थे ।
(iii) बिना अर्थ के शब्द-रचना करते थे । 
(iv) उपरोक्त सभी
 उत्तर-(iv) उपरोक्त सभी
6.किसको समझना लेखक के लिए छोटा मुँह बड़ी बात थी ? 
(i) बड़े भाई साहब की रचनाओं को 
(ii) बड़े भाई साहब को 
(iii) बड़े भाई साहब के स्वभाव को 
(iv) बड़े भाईसाहब के शेर को 
उत्तर- बड़े भाई साहब की रचनाओं को 
7.पाठ और लेखक का नाम लिखिए । 
(i) पाठ- प्रेमचंद, लेखक- बड़े भाई साहब
(ii) पाठ-भाई साहब, लेखक- लीलाधर मंडलोई 
(iii) पाठ- बड़े भाई साहब, लेखक-प्रेमचंद  
(iv) पाठ- तोप, लेखक- सुमित्रानंदन 
 उत्तर-(iii) पाठ- बड़े भाई साहब, लेखक-प्रेमचंद 
8.लेखक ने किस पहेली का अर्थ निकालने की कोशिश की ?
(i) लेखक के बड़े भाई साहब द्वारा दी गई पहली का 
(ii) बड़े भाई साहब द्वारा कॉपी पर लिखे गए लेख रूपी पहेली का 
(iii) बड़े भाई साहब द्वारा कॉपी पर बनाए गए आदमी के चेहरे रूपी पहेली का 
(iv) उपयुक्त (ii) तथा (iii)
 उत्तर-(iv) उपयुक्त (ii) तथा (iii)
9. लेखक को बड़े भाई साहब से क्या पूछने का साहस न हुआ ?
(i) बड़े भाई साहब से उनके इबारत का अर्थ पूछने का 
(ii) बड़े भाई साहब की कॉपी पर बने आदमी के चेहरे की पहेली का हल पूछने का 
(iii) बड़े भाई साहब से पढ़ाई के बीच में दिमाग को आराम देने की आवश्यकता का कारण जानने का 
(iv) उपयुक्त (i) तथा (ii) दोनों 
उत्तर-(iv) उपयुक्त (i) तथा (ii) दोनों 
10. बड़े भाई साहब कॉपी और किताबों के हाशियों पर चित्र क्यों बनाया करते थे ?
(i) पढ़ाई से बचने के लिए 
(ii) समय काटने के लिए  
(iii) अपने दिमाग को आराम देने के लिए 
(iv) चित्रकारी पसंद होने के कारण 
उत्तर-(iii) अपने दिमाग को आराम देने के लिए 

II.भाई साहब उपदेश की कला में निपुण थे । ऐसी-ऐसी लगती बातें कहते, ऐसे-ऐसे सूक्ति-बाण चलाते कि मेरे जिगर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते और हिम्मत टूट जाती। इस तरह जान तोड़कर मेहनत करने की शक्ति में अपने में न पाता था और उस निराशा में जरा देर के लिए मैं सोचने लगता- 'क्यों न घर चला जाऊँ। जो काम मेरे बूते के बाहर है, उसमें हाथ डालकर क्यों अपनी जिंदगी खराब करूँ।' मुझे अपना मूर्ख रहना मंजूर था, लेकिन उतनी मेहनत से मुझे तो चक्कर आ जाता था, लेकिन घंटे दो घंटे के बाद निराशा के बादल फट जाते और मैं इरादा करता कि आगे से खूब जी लगाकर पढूँगा। चटपट एक टाइम-टेबिल बना डालता। 
1. भाई साहब किस कला में निपुण थे ? 
(i) चित्रकला में 
(ii) संगीत कला में 
(iii) नृत्यकला में  
(iv) उपदेश कला में 
उत्तर- (iv) उपदेश कला में 
2.लेखक की हिम्मत क्यों टूट जाती थी ? 
(i) खेल-कूद करने से 
(ii) असफल होने पर 
(iii) पढ़ाई में अरुचि होने के कारण 
(iv) कटु और तीक्ष्ण उपदेशरूपी व्यंग्य बाण सुनकर 
उत्तर- (iv) कटु और तीक्ष्ण उपदेशरूपी व्यंग्य बाण सुनकर 
3.निराश होने पर लेखक क्या सोचने लगता ? 
(i) घर जाने के बारे में 
(ii) पढ़ने के बारे में 
(iii) स्कूल जाने के बारे में 
(iv) उपरोक्त सभी 
उत्तर-(i) घर जाने के बारे में 
4. गद्यांश में 'मैं' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है ? 
(i) बड़े भाई साहब के लिए 
(ii) लेखक के लिए 
(iii) श्रोता के लिए 
(iv) पाठक के लिए 
उत्तर-(ii) लेखक के लिए 
5.घंटे-दो-घंटे बीत जाने के बाद लेखक क्या करता ? 
(i) निराशा से बाहर होता है। 
(ii) जी लगाकर पढ़ता। 
(iii) एक टाइम-टेबिल बनाता। 
(iv) घर चला जाता । 
उत्तर-(iii) एक टाइम-टेबिल बनाता।
6. लेखक से कौन-सा अपराध हो गया था ? 
(i) उसने बड़े भाई साहब को जवाब दिया था। 
(ii) उसने बड़े भाई साहब की बातों को अनसुना किया था। 
(iii) उसने पढ़ाई-लिखाई की जगह खेल-कूद में समय लगाया था। 
(iv) इनमें से कोई नहीं 
उत्तर-(iii) उसने पढ़ाई-लिखाई की जगह खेल-कूद में समय लगाया था। 
7. कौन उपदेश की कला में निपुण था ? 
(i) बड़े भाई साहब 
(ii) छोटा भाई 
(iii) बड़े तथा छोटे भाई दोनों 
(iv) इनमें से कोई नहीं 
उत्तर-(i) बड़े भाई साहब
8.लेखक की हिम्मत टूट जाती तथा उसके जिगर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते, क्यों ? 
(i) बड़े भाई साहब की चुभने वाली बातों तथा सूक्ति-बाणों से 
(ii) बड़े भाई साहब की निराशा भरी बातों से 
(iii) परीक्षा में बार-बार असफल होने के कारण 
(iv) उपर्युक्त सभी 
उत्तर-(i) बड़े भाई साहब की चुभने वाली बातों तथा सूक्ति-बाणों से 
9.लेखक अपने अंदर कैसी शक्ति नहीं पाता था ? 
(i) बार-बार असफल होने के बाद भी पुनः उठ खड़े होने की 
(ii) जान तोड़कर मेहनत करने की 
(iii) बड़े भाई साहब के सवालों का जवाब देने की 
(iv) इनमें से कोई नहीं 
उत्तर-(ii) जान तोड़कर मेहनत करने की
10.थोड़ी देर के लिए वापस घर चले जाने तथा पढ़ाई छोड़ने की बात लेखक के मन में क्यों उठी ? 
(i) लेखक की चुभती बातों से निराश होने के कारण 
(ii) अपने में जी-तोड़कर पढ़ाई-लिखाई की क्षमता न पाकर 
(iii) अपनी कक्षा में लगातार असफल होने के कारण 
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-(ii) अपने में जी-तोड़कर पढ़ाई-लिखाई की क्षमता न पाकर 

III. "इस तरह अंग्रेज़ी पढ़ोगे, तो जिंदगी-भर पढ़ते रहोगे और एक हर्फ़ न आएगा। अंग्रेज़ी पढ़ना कोई हँसी-खेल नहीं है कि जो चाहे, पढ़ ले, नहीं ऐरा-गैरा नत्थू-खेरा सभी अंग्रेज़ी के विद्वान हो जाते। यहाँ रात-दिन आँखें फोड़नी पड़ती हैं और खून जलाना पड़ता है, तब कहीं यह विद्या आती है और आती क्या है, हाँ कहने को आ जाती है। बड़े-बड़े विद्वान भी शुद्ध अंग्रेज़ी नहीं लिख सकते, बोलना तो दूर रहा। और मैं कहता हूँ, तुम कितने घोंघा हो कि मुझे देखकर भी सबक नहीं लेते। मैं कितनी मिहनत करता हूँ, यह तुम अपनी आँखों से देखते हो, अगर नहीं देखते, तो यह तुम्हारी आँखों का कसूर है, तुम्हारी बुद्धि का कसूर है। इतने मेले-तमाशे होते हैं, मुझे तुमने कभी देखने जाते देखा है ? रोज़ ही क्रिकेट और हॉकी मैच होते हैं। मैं पास नहीं फटकता।" 
1.ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा अंग्रेजी के विद्वान क्यों नहीं हो जाते ? 
(i) अंग्रेजी पढ़ना कठिन होने के कारण । 
(ii) उनमें इच्छा शक्ति नहीं होने के कारण । 
(iii) अच्छी पुस्तकों के अभाव में 
(iv) योग्य शिक्षक नहीं मिलने के कारण 
उत्तर-(i) अंग्रेजी पढ़ना कठिन होने के कारण 
2. कौन-सी विद्या सीखने के लिए रात-दिन आँखें फोड़नी पड़ती हैं तथा खून जलाना पड़ता है ? 
(i) काली विद्या 
(ii) जादू की विद्या
(iii) अंग्रेजी की विद्या 
(iv) उपर्युक्त सभी 
उत्तर-(iii) अंग्रेजी की विद्या 
3. कौन शुद्ध अंग्रेज़ी नहीं लिख सकते, बोलना तो दूर की बात है ? 
(i) छोटा भाई 
(ii) बड़े भाई साहब 
(iii) बड़े-बड़े विद्वान 
(iv) इनमें से कोई नहीं 
उत्तर-(iii) बड़े-बड़े विद्वान 
4.बड़े भाई साहब के अनुसार क्या नहीं देखना छोटे भाई की आँखों और बुद्धि का कसूर है ? 
(i) मेले-तमाशे 
(ii) विभिन्न खेलों के मैच 
(iii) फ़िल्म 
(iv) बड़े भाई साहब की पढ़ाई की मेहनत
उत्तर-(iv) बड़े भाई साहब की पढ़ाई की मेहनत
5. बड़े भाई साहब क्रिकेट और हॉकी मैचों के पास भी नहीं फटकते । क्यों ? 
(i) मैच रोचक न होने के कारण 
(ii) खेलों में रुचि नहीं होने के कारण 
(iii) स्टेडियम दूर होने के कारण 
(iv) बराबर पढ़ाई में लगे रहने के कारण
उत्तर-(iv) बराबर पढ़ाई में लगे रहने के कारण

IV. महज इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास जो कुछ पढ़ो, उसका अभिप्राय समझो। रावण भूमंडल का स्वामी था। ऐसे राजाओं को चक्रवतों कहते हैं। आजकल अंग्रेजों के राज्य का विस्तार बहुत बड़ा हुआ है, पर इन्हें चक्रवती नहीं कह सकते। संसार में अनेक राष्ट्र अंग्रेजी का आधिपत्य स्वीकार नहीं करते, बिलकुल स्वाधीन है। रावण चक्रवती राजा था, संसार के सभी महाँप उसे कर देते थे। बड़े-बड़े देवता उसकी गुलामी करते थे। आग और पानी के देवता भी उसके दास थे, मगर उसका अंत क्या हुआ ? घमंड ने उसका नाम निशान तक मिटा दिया, कोई उसे एक चुल्लू पानी देने वाला भी न बचा। आदमी और ज कुकर्म चाहे करे, पर अभिमान न करें, इतराये नहीं । अभिमान किया और दीन-दुनिया दोनों से गया। 
1.रावण कौन था ? 
(i) अयोध्या का राजा 
(ii) देवताओं का दास 
(iii) भूमंडल का स्वामी 
(iv) अंग्रेजों का मददगार 
उत्तर-(iii) भूमंडल का स्वामी
2. रावण चक्रवर्ती सम्राट क्यों था ? 
(i) क्योंकि संसार के सभी राजा उसे कर देते थे। 
(ii) क्योंकि बड़े-बड़े देवता उसकी गुलामी करते थे। 
(iii) क्योंकि आग और पानी के देवता भी उसके दास थे । 
(iv) उपरोक्त सभी। 
उत्तर- (iv) उपरोक्त सभी। 
3. किसने रावण का नामो-निशान मिटा दिया ? 
(i) धन-दौलत ने 
(ii) लालच ने 
(iii) घमंड ने 
(iv) श्री राम ने 
 उत्तर-(iii) घमंड ने  
4. 'नामो-निशान मिटाना' का अर्थ है- 
(i) कहीं का न रहना। 
(ii) नाम लिखकर मिटाना। 
(iii) सब कुछ नष्ट करना। 
(iv) इनमें से कोई नहीं। 
उत्तर- (iii) सब कुछ नष्ट करना।  
5.कौन किसे रावण का उदाहरण देकर समझा रहा है ? 
(i) राम, रावण को 
(ii) भाई साहब, लेखक को 
(iii) लेखक, पाठक को 
(iv) पाठक, श्रोता को  
उत्तर- (ii) भाई साहब, लेखक को
6. शिक्षा प्राप्ति का मूल उद्देश्य है -
(i) केवल इम्तिहान पास कर लेना ।
(ii) पढ़ी चीजों का अभिप्राय समझना। 
(iii) बुद्धि का विकास करना । 
( iv ) ( ii ) तथा ( iii ) दोनों 
उत्तर-( iv ) ( ii ) तथा ( iii ) दोनों 
7. अंग्रेज़ों को चक्रवर्ती क्यों नहीं कहा जा सकता ? 
(i) अंग्रेजों के राज्य का विस्तार संपूर्ण भूमंडल पर नहीं था। 
(ii) संसार के सभी राष्ट्र अंग्रेजों का आधिपत्य स्वीकार नहीं करते। 
(iii) (i) तथा (ii) दोनों 
(iv) इनमें से कोई नहीं 
उत्तर-(iii) (i) तथा (ii) दोनों 
8. रावण का अंत क्यों हुआ ? 
(i) देवताओं को अपना दास बनाने के कारण 
(ii) स्वयं पर अभिमान करने के कारण
(iii) संसार के सभी राजाओं से कर लेने के कारण 
(iv) सभी बंधु-बांधवों के मारे जाने के कारण 
उत्तर-(ii) स्वयं पर अभिमान करने के कारण
9.आदमी को कौन-सा कर्म नहीं करना चाहिए ? 
(i) अभिमान करना 
(ii) इतराना 
(iii) लोगों को सताना
(iv) (i) और (ii) दोनों  
उत्तर-(iv) (i) और (ii) दोनों 

V. जितना आज हम और तुम खर्च कर रहे हैं, उसके आधे में दादा ने अपनी उम्र का बड़ा भाग इज्ज़त और नेकनामी के साथ निभाया है और कुटुम्ब का पालन किया है जिसमें सब मिलकर नौ आदमी थे। अपने हेडमास्टर साहब को ही देखो । एम.ए. हैं कि नहीं और यहाँ के एम.ए. नहीं, ऑक्सफोर्ड के एक हजार रुपये पाते हैं; लेकिन उनके घर का इंतजाम कौन करता है ? उनकी बूढ़ी माँ हेडमास्टर साहब की डिग्री यहाँ बेकार हो गई। पहले खुद घर का इंतजाम करते थे खर्च पूरा न पड़ता था । कर्जदार रहते थे। जब से उनकी माता जी ने प्रबंध अपने हाथ में ले लिया है, जैसे घर में लक्ष्मी आ गई है तो भाईजान, यह गरूर दिल से निकाल डालो कि तुम मेरे समीप आ गए हो और अब स्वतंत्र हो। मेरे देखते तुम बेराह न चलने पाओगे।
1. हेडमास्टर साहब ने एम.ए. की शिक्षा कहाँ से प्राप्त की थी ? 
(i) दिल्ली विश्वविद्यालय से 
(ii) न्यूयार्क से 
(iii) ऑक्सफोर्ड से 
(iv) हिंदू विश्वविद्यालय से 
उत्तर-(iii) ऑक्सफोर्ड से 
2. हेडमास्टर साहब का वेतन कितना था ? 
(i) एक हजार रुपए 
(ii) चार हज़ार रुपए 
(iii) दो हज़ार रुपए 
(iv) सौ रुपए 
उत्तर-(i) एक हजार रुपए 
3.लेखक के दादा के परिवार में कुल कितने सदस्य थे ? 
(i) दो 
(ii) चार 
(iii) नौ 
(iv) आठ 
 उत्तर- (iii) नौ 
4. 'तुम मेरे समीप आ गए हो' से बड़े भाई साहब का क्या तात्पर्य है ?
(i) उम्र में बराबर हो गए हो। 
(ii) कक्षा में एक दरज़ा नीचे हो।  
(iii) (i) और (ii) दोनों 
(iv) इनमें कोई नहीं। 
उत्तर-(ii) कक्षा में एक दरज़ा नीचे हो
5. हेडमास्टर के घर का प्रबंध किसने अपने हाथों में ले लिया ?
(i) हेडमास्टर स्वयं 
(ii) लेखक के दादा 
(iii) लेखक के बड़े भाई 
(iv) हेडमास्टर की माता जी 
उत्तर- (iv) हेडमास्टर की माता जी

VI. पहले ही दिन उसकी अवहेलना शुरू हो जाती । मैदान की वह सुखद हरियाली, हवा के हलके हलके झोंके, फुटबाल की वह उछल-कूद, कबड्डी के वह दाँव-घात, वॉलीबाल की वह तेजी और फुरती, मुझे अज्ञात और अनिवार्य रूप से खींच ले जाती और वहाँ जाते ही मैं सब कुछ भूल जाता। वह जानलेवा टाइम-टेबिल, वह आँखफोड़ पुस्तकें, किसी की याद न रहती और भाई साहब को नसीहतऔर फ़जीहत का अवसर मिल जाता। मैं उनके साये से भागता, उनकी आँखों से दूर रहने की चेष्टा करता, कमरे में इस तरह दबे पाँव आता कि उन्हें खबर न हो। उनकी नज़र मेरी ओर उठी और मेरे प्राण निकले। हमेशा सिर पर एक नंगी तलवार-सी लटकती मालूम होती। फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था। 
1.भाई साहब को नसीहत और फजीहत का अवसर क्यों मिल जाता ? 
(i) छोटे भाई का उनकी बात न मानने के कारण। 
(ii) छोटे भाई का टाइम-टेबिल के अनुसार काम न करके खेल-कूद पर ध्यान देने के कारण। 
(iii) छोटे भाई का अपनी कक्षा में लगातार असफल होने के कारण। 
(iv) उपर्युक्त सभी। 
उत्तर-(ii) छोटे भाई का टाइम-टेबिल के अनुसार काम न करके खेल-कूद पर ध्यान देने के कारण
2. छोटा भाई क्यों बड़े भाई साहब के साये से दूर भागने तथा उनकी आँखों से दूर रहने की चेष्टा करने लगा ? 
(i) उनकी काम बताने की आदत से बचने के लिए।  
(ii) उनकी नसीहत तथा फ़जीहत से बचने के लिए।  
(iii) ताकि उनको उसके खेल-कूद में भाग लेने का पता न चल सके। 
(iv) इनमें से कोई नहीं । 
उत्तर-(ii) उनकी नसीहत तथा फ़जीहत से बचने के लिए 
3. 'हमेशा सिर पर एक नंगी तलवार सो लटकती मालूम होती।' इसका आशय है- 
(i) लेखक को सदा बड़े भाई साहब को निगरानी तथा डॉट-फटकार का डर बना रहता । 
(ii) लेखक को अपने भाई साहब की सलाह तथा उनके द्वारा किए जाने वाले अपमान का खतरा बना रहता। 
(iii) (i) तथा (ii) दोनों 
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं 
उत्तर-(i) लेखक को सदा बड़े भाई साहब को निगरानी तथा डॉट-फटकार का डर बना रहता । 
4. लेखक फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार क्यों नहीं कर सकता था ? 
(i) खेल-कूद में सुनहरा भविष्य दिखने के कारण। 
(ii) खेल से मिलने वाले आनंद तथा उसमें अत्यधिक मन लगने के कारण। 
(iii) फटकार तथा घुड़कियों का असर समाप्त हो जाने के कारण। 
(iv) भाई साहब की फटकार तथा घुड़कियों को महत्व न देने के कारण। 
उत्तर-(ii) खेल से मिलने वाले आनंद तथा उसमें अत्यधिक मन लगने के कारण। 
5. आदमी मौत और विपत्ति के बीच भी मोह और माया के बंधन में क्यों जकड़ा रहता है ? 
(i) मोह और विपत्ति अत्यधिक लगाव के कारण। 
(ii) मौत और विपत्ति से मुक्त न होने के कारण। 
(iii) मोह और माया से मुक्त न होने के कारण।  
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं। 
उत्तर-(i) मोह और विपत्ति अत्यधिक लगाव के कारण। 

VII.सालाना इम्तिहान हुआ भाई साहब फेल हो गए, मैं पास हो गया और दरजे में प्रथम आया। मेरे और उनके बीच में केवल दो साल का अंतर रह गया जी में आया, भाई साहब को आड़े हाथों लूँ आपको वह घोर तपस्या कहाँ गई ? मुझे देखिए, मजे से खेलता भी रहा और दरजे में अव्वल भी हूँ। लेकिन वह इतने दुखी और उदास थे कि मुझे उनसे दिली हमदर्दी हुई और उनके घाव पर नमक छिड़कने का विचार ही लज्जास्पद जान पड़ा। हाँ, अब मुझे अपने ऊपर कुछ अभिमान हुआ और आत्मसम्मान भी बढ़ा। भाई साहब का रौब मुझ पर न रहा। आजादी से खेलकूद में शरीक होने लगा। दिल मज़बूत था। अगर उन्होंने फिर मेरी फजीहत की तो साफ कह दूँगा- 'आपने अपना खून जलाकर कौन-सा तीर मार लिया। मैं तो खेलते-कूदते दरजे में अव्वल आ गया। जबान से यह हेकड़ी जताने का साहस न होने पर भी मेरे रंग-ढंग से साफ जाहिर होता था कि भाई साहब का वह आतंक मुझ पर नहीं था। 
1. सालाना परीक्षा का क्या परिणाम रहा ? 
(i) भाई साहब पास हो गए और लेखक फेल हो गए। 
(ii) भाई साहब फेल हो गए और लेखक दरजे में अव्वल आया। 
(iii) भाई साहब और लेखक दोनों फेल हो गए। 
(iv) भाई साहब अव्वल आ गए और लेखक दरजे में तृतीय आया। 
उत्तर-(ii) भाई साहब फेल हो गए और लेखक दरजे में अव्वल आया। 
2. लेखक दुःखी क्यों थे ? 
(i) बड़े भाई साहब को दुखी और उदास देखकर 
(ii) बड़े भाई साहब को पछताते देखकर   
(iii) बड़े भाई साहब के निराश होकर हॉस्टल छोड़ने पर 
(iv) इनमें से कोई नहीं 
उत्तर-(i) बड़े भाई साहब को दुखी और उदास देखकर 
3.दोनों के बीच केवल दो साल का अंतर रह गया तो छोटे भाई के मन में क्या विचार आया ? 
(i) बड़े भाई साहब के साथ बैठकर रोने का 
(ii) बड़े भाई साहब की खिल्ली उड़ाएँ। 
(iii) बड़े भाई साहब को आड़े हाथों लें। 
(iv) बड़े भाई साहब से अपना इनाम माँगने का। 
उत्तर-(iii) बड़े भाई साहब को आड़े हाथों लें।
4. कक्षा में प्रथम आने पर लेखक के स्वभाव में क्या परिवर्तन आया ? 
(i) उनका आत्मविश्वास कम हो गया। 
(ii) उन्हें अपने ऊपर अभिमान हो गया। 
(iii) वे आज़ाद होकर खेलने-कूदने लगे। 
(iv) (ii) और (iii) दोनों कथन सत्य हैं। 
उत्तर-(iv) (ii) और (iii) दोनों कथन सत्य हैं। 
 5. 'बड़े भाई साहब' कहानी किस शैली में लिखी गयी है ? 
(i) संवादात्मक शैली में 
(ii) आत्म-कथात्मक शैली में
(iii) व्यंग्यात्मक शैली में 
(iv) वर्णनात्मक शैली में
उत्तर-(ii) आत्म-कथात्मक शैली में
6. छोटे भाई को क्या लज्जास्पद जान पड़ा ? 
(i) बड़े भाई साहब के सालाना इम्तिहान में फेल होने के बाद उनसे उनकी घोर तपस्या के बारे में पूछने की बात मन में आना। 
(ii) छोटे भाई को अपने ऊपर हुए अभिमान का पता चलना। 
(iii) बड़े भाई साहब के लेखक को फजीहत करने पर उन्हें जवाब देने की सोचना। 
(iv) इनमें से कोई नहीं।  
उत्तर-(i) बड़े भाई साहब के सालाना इम्तिहान में फेल होने के बाद उनसे उनकी घोर तपस्या के बारे में पूछने की बात मन में आना। 
7. बड़े भाई साहब क्यों दुखी और उदास थे ? 
(i) छोटे भाई के पास होने के कारण।  
(ii) खुद के फेल होने के कारण।  
(iii) छोटे भाई के ताना मारने के कारण।  
(iv) छोटे भाई के बात न मानने के कारण। 
उत्तर-(ii) खुद के फेल होने के कारण।  
8.छोटे भाई का अभिमान और आत्मसम्मान क्यों बढ़ गया ? 
(i) बड़े भाई का उसकी फजीहत नहीं करने के कारण। 
(ii) बड़े भाई के अपने दरजे में फेल होने तथा खुद के अपने दरजे में प्रथम स्थान के साथ पास होने के कारण। 
(iii) खुद के खेल-कूद में काफी अच्छा करने के कारण।  
(iv) उपर्युक्त सभी। 
उत्तर-(ii) बड़े भाई के अपने दरजे में फेल होने तथा खुद के अपने दरजे में प्रथम स्थान के साथ पास होने के कारण। 
9. सालाना इम्तिहान का परिणाम आने के बाद निम्नलिखित में से क्या नहीं हुआ ? 
(i) बड़े भाई साहब का लेखक पर पहले जैसा रौब नहीं रहा। 
(ii) लेखक आजादी से खेलकूद में शरीक होने लगा। 
(iii) बड़े भाई साहब के फजीहत करने पर उनको जवाब देने की बात लेखक के मन में आई। 
(iv) इनमें से कोई नहीं। 
उत्तर- (iv) इनमें से कोई नहीं। 

VIII. अनर्थ तो यह है कि कहा जाता है, संक्षेप में लिखो। समय की पाबंदी पर संक्षेप में एक निबंध लिखो, जो चार पन्नों से कम न हो। ठीक। संक्षेप में तो चार पन्ने हुए, नहीं शायद सौ-दो सौ पन्ने लिखवाते। तेज़ भी दौड़िए और धीरे-धीरे भी है उलटी बात है या नहीं ? बालक भी इतनी-सी बात समझ सकता है, लेकिन इन अध्यापकों को इतनी तमीज़ भी नहीं उस पर दावा है कि हम अध्यापक हैं। मेरे दरजे में आओगे लाला, तो ये सारे पापड़ बेलने पड़ेंगे और तब आटे-दाल का भाव मालूम होगा। इस दरजे में अव्वल आ गए हो, तो ज़मीन पर पाँव नहीं रखते। इसलिए मेरा कहना मानिए। लाख फेल हो गया हूँ, लेकिन तुमसे बड़ा हूँ, संसार का मुझे तुमसे कहीं ज्यादा अनुभव है। जो कुछ कहता हूँ उसे गिरह बाँधिए, नहीं पछताइएगा। 
1.क्या संक्षेप में लिखने के लिए कहा जाता है ? 
(i) लेख 
(ii) निबंध 
(iii) कहानी 
(iv) भाषण 
उत्तर-(ii) निबंध 
2. लेखक के अनुसार अगर संक्षेप में लिखा जाने वाला निबंध चार पन्नों का होगा तो वह निबंध कितने पन्नों में लिखा जाएगा जो संक्षेप में नहीं लिखना होगा ? 
(i) दस-बारह पन्नों में 
(ii) बीस-इक्कोस पत्नों में 
(iii) सौ-दो सौ पन्नों में 
(iv) पचास-साठ पन्ना में 
उत्तर-(iii) सौ-दो सौ पन्नों में 
3. लेखक के अनुसार अध्यापकों को किस बात की तमीज़ नहीं ? 
(i) संक्षेप में लिखी जाने वाली बात चार पन्नों में नहीं लिखी जाएगी। 
(ii) एक ही समय तेज और धीरे-धीरे नहीं दौड़ा जा सकता। 
(iii) (i) तथा (ii) दोनों 
(iv) इनमें से कोई नहीं 
उत्तर-(iii) (i) तथा (ii) दोनों
4. 'मेरे दरजे में आओगे लाला, तो ये सारे पापड़ बेलने पड़ेंगे।' का आशय क्या है ? 
(i) लेखक को बड़े भाई के दरजे में आने पर संक्षिप्त निबंध आदि लिखना पड़ेगा। 
(ii) लेखक को पापड़ का व्यापार करना पड़ेगा।
(iii) लेखक को बेचने के लिए पापड़ बेलना पड़ेगा । 
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं  
उत्तर-(i) लेखक को बड़े भाई के दरजे में आने पर संक्षिप्त निबंध आदि लिखना पड़ेगा। 
5. बड़े भाई किस मामले में छोटे भाई से आगे है ? 
(i) संसार के अनुभव के मामले में 
(ii) उम्र के मामले में 
(iii) जानकारी के मामले में 
(iv) (i) तथा (ii) दोनों 
उत्तर-(iv) (i) तथा (ii) दोनों 

XI. स्कूल का समय निकट था, नहीं इश्वर जाने यह उपदेश-माला कब समाप्त होता। भोजन आज निःस्वाद-सा लग रहा था। जब पास होने पर यह तिरस्कार हो रहा है, तो फल हो जाने पर तो प्राण ही ले लिए जाएँ। भाई साहब ने अपने दरजे की पढ़ाई का जो भयकर चित्र खींचा था, उसने मुझे भयभीत कर दिया। स्कूल छोड़कर घर नहीं भागा, यहाँ ताज्जुब है, लेकिन इतने तिरस्कार पर भी पुस्तकों में मेरी अरुचि ज्यों-की-त्यों बनी रही। खेल-कूद का कोई अवसर हाथ से न जाने देता। पड़ता भी, मगर बहुत कम बस इतना कि रोज़ टास्क पूरा हो जाए और दरजे में ज़लील न होना पड़ अपने ऊपर जो विश्वास पैदा हुआ था, वह फिर लुप्त हो गया और फिर चोरों का-सा जीवन कटने लगा । 1.लेखक के अनुसार बड़े भाई साहब की उपदेश-माला क्यों समाप्त हो गई ?
(i) जानकारी के मामले में
(ii) स्कूल का समय निकट होने के कारण 
(iii) छोटे भाई के हार मान लेने के कारण
(iv) उपर्युक्त सभी 
उत्तर-(ii) स्कूल का समय निकट होने के कारण  
2.  लेखक को आज भोजन क्यों निःस्वाद लग रहा ?
(i) तबीयत ठीक नहीं होने के कारण 
(ii) बड़े भाई साहब का उपदेश सुनने के कारण 
(iii) बहुत अधिक थक जाने के कारण 
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (ii) बड़े भाई साहब का उपदेश सुनने के कारण 
3. लेखक को किस चीज ने भयभीत कर दिया ? 
(i) बड़े भाई साहब के दरजे की पढ़ाई के भयंकर चित्र ने 
(ii) बड़े भाई साहब की उपदेश माला ने
(iii)  बड़े भाई साहब की नसीहतों एवं फजीहतों ने
(iv) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर-(i) बड़े भाई साहब के दरजे की पढ़ाई के भयंकर चित्र ने 
4. लेखक कितनी पढ़ाई करते थे ? 
(i) बहुत ज्यादा 
(ii) जरूरत के अनुसार 
(iii) उतनी ही जितनी ज़रूरत हो और दरजे में जलील न होना पड़े। 
(iv) पढ़ना ही बंद कर 
उत्तर-(iii) उतनी ही जितनी ज़रूरत हो और दरजे में जलील न होना पड़े । 
5.  बड़े भाई साहब के उपदेशों का लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा ? 
(i) विश्वास बढ़ गया।  
(ii) विश्वास कम हो गया । 
(iii) विश्वास लुप्त हो गया। 
(iv) उपर्युक्त सभी था ? 
उत्तर-(iii) विश्वास लुप्त हो गया।

X. अब भाई साहब बहुत कुछ नरम पड़ गए थे। कई बार मुझे डाँटने का अवसर पाकर भी उन्होंने धीरज से काम लिया। शायद अब वह खुद समझने लगे थे कि मुझे डाँटने का अधिकार उन्हें नहीं रहा, या रहा भी, तो बहुत कम। मेरी स्वच्छंदता भी बढ़ी। मैं उनकी सहिष्णुता का अनुचित लाभ उठा लगा। मुझे कुछ ऐसी धारणा हुई कि मैं पास हो ही जाऊँगा, पढ़े या न पढ़े, मेरी तकदीर बलवान है, इसलिए भाई साहब के डर से जो थोड़ा-बहुत पढ़ लिया करता था, वह भी बंद हुआ। मुझे कनकौए उड़ाने का नया शौक पैदा हो गया था और अब सारा समय पतंगबाजी की ही भेंट होता था, फिर भी मैं भाई साहब का अदब करता था और उनकी नज़र बचाकर कनकौए उड़ाता था। मांझा देना, कन्ने बाँधना, पतंग टूर्नामेंट की तैयारियाँ आदि समस्याएँ सब रूप से हल की जाती थीं। 
1. अब भाई साहब क्यों बहुत कुछ नरम पड़ गए थे ? 
(i) लेखक के लगातार दूसरी बार अपने दरजे में अव्वल रहते हुए पास होने के कारण। 
(ii) बड़े भाई साहब के फिर से फेल होने के कारण। 
(iii) (i) तथा (ii) दोनों 
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-(iii) (i) तथा (ii) दोनों 
2. भाई साहब के नहीं डाँटने का लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा ? 
(i) लेखक की स्वच्छंदता बढ़ गई। 
(ii) लेखक धीर-गंभीर हो गया। 
(iii) लेखक ने बड़े भाई साहब का सम्मान और लिहाज़ करना बंद कर दिया। 
(iv) उपर्युक्त सभी 
उत्तर-(i) लेखक की स्वच्छंदता बढ़ गई। 
3. लेखक की पढ़ाई-लिखाई क्यों बंद हो गई ? 
(i) हर हाल में अपने पास हो जाने की धारणा बन जाने के कारण। 
(ii) लेखक की स्वयं की तकदीर बलवान होने के कारण। 
(iii) भाई साहब कर डर दिल से निकल जाने के कारण। 
(iv) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-(i) हर हाल में अपने पास हो जाने की धारणा बन जाने के कारण।  
4. लेखक को किस चीज़ का नया शौक पैदा हो गया था ? 
(i) गुल्ली-डंडा खेलने का 
(ii) कनकौए उड़ाने का 
(iii) बटेर लड़ाने का 
(iv) मुर्गे लड़ाने का 
उत्तर-(ii) कनकौए उड़ाने का 
5. लेखक कनकौए उड़ाने, मांझा देने, कन्ने बाँधने, पतंग टूर्नामेंट की तैयारियाँ आदि काम बड़े भाई की नज़र बचाकर क्यों करता था ?. 
(i) उसे अपने इन कामों में बड़े भाई के शामिल होने का डर रहता था। 
(ii) बड़े भाई साहब के सम्मान और लिहाज़ को बनाए रखने के लिए। 
(iii) भाई साहब का अदब करने के लिए 
(iv) (ii) और (iii) दोनों
उत्तर-(iv) (ii) और (iii) दोनों

Wednesday, 10 November 2021

Class 9 Sanskrit Lesson-5 Anuvaad suktimoktikm SAAR/पाठ-5 सूक्तिमौक्तिकम् पाठ का अनुवाद


पाठ का अनुवाद :
नीति-ग्रंथों की दृष्टि से संस्कृत साहित्य काफी समृद्ध है। इन ग्रंथों में सरल और सारगर्भित भाषा में नैतिक शिक्षाएँ दी गई हैं। इनके द्वारा मनुष्य अपना जीवन सफल और समृद्ध बना सकता है। ऐसे ही मूल्यवान कुछ सुभाषित इस पाठ में संकलित किए गए हैं। 
* मनुष्य को अपने आचरण की रक्षा करनी चाहिए। धन नश्वर है। वह कभी आता है तो कभी चला जाता है। 
* जैसा व्यवहार स्वयं को अच्छा न लगे, वैसा व्यवहार दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए । 
*मीठे बोल सभी को प्रिय लगते हैं। अतः मीठा बोलना चाहिए। मनुष्य को बोलने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। 
* महापुरुष अपने लिए कुछ नहीं करते हैं। वे सदा परोपकार करते रहते हैं। इसका कारण है कि महापुरुषों का पृथ्वी पर आगमन परोपकार के लिए ही होता है। 
* मनुष्य का गुणों के लिए यत्न करना चाहिए। गुणों के द्वारा वह महान बनता है।
* सज्जन लोगों की मित्रता स्थायी होती है, जबकि दुर्जन लोगों की मित्रता अस्थायी। 
* हंस तालाब की शोभा होते हैं। यदि ये किसी तालाब में इस नहीं हैं तो यह उस तालाब के लिए हानिकर है।
* गुणज्ञ व्यक्ति को पाकर गुण गुण बन जाते हैं, परंतु निर्गुण को प्राप्त करके वे ही गुण दोष बन जाते हैं। 

1. वृत्तं यत्नेन संरक्षेद् वित्तमेति च याति च। 
   अक्षीणो वित्तत: क्षीणो वृत्ततस्तु हतो हतः।।        -मनुस्मृतिः 

शब्दार्थाः - वित्तम् - धन, ऐश्वर्य , वृत्तम्- आचरण, चरित्र , अक्षीणः - नष्ट नहीं होता , क्षीणः नष्ट होना , वृत्ततः – आचरण से हृतः नष्ट हो जाना , एति - आता है , याति - जाता है , संरक्षेत् - रक्षा करनी चाहिए , यलेन - प्रयत्नपूर्वक । 
अर्थ- हमें अपने आचरण की प्रयत्नपूर्वक रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि धन तो आता है और चला जाता है, धन के नष्ट हो जाने पर मनुष्य नष्ट नहीं होता है। परंतु चरित्र या आचरण के नष्ट हो जाने पर मनुष्य भी नष्ट हो जाता है।

2. श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैवावधार्यताम् । 
    आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत् ॥        - विदुरनीति : 
शब्दार्थाः -श्रूयतां-सुनो, धर्मसर्वस्व - धर्म के तत्व को , श्रुत्वा - सुनकर , अवधार्यताम् - ग्रहण करो , प्रतिकूलानि - विपरीत , परेषाम् - दूसरों के प्रति , समाचरेत् - आचरण नहीं करना चाहिए , आत्मन : -अपने । 
अर्थ- धर्म के तत्व को सुनो और सुनकर उसको ग्रहण करो , उसका पालन करो । अपने से प्रतिकूल व्यवहार का आचरण दूसरों के प्रति कभी नहीं करना चाहिए अर्थात् जो व्यवहार आपको अपने लिए पसंद नहीं है, वैसा आचरण दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए।

3. प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः। 
तस्माद् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता॥               - चाणक्यनीतिः 
शब्दार्था : - प्रियवाक्यप्रदानेन प्रिय वाक्य बोलने से , तुष्यन्ति प्रसन्न होते हैं , जन्तवः- प्राणी , वक्तव्यम् कहने चाहिए , वचने - बोलने में, दरिद्रता-गरीबी, कंजूसी । 
अर्थ- प्रिय वचन बोलने से सब प्राणी प्रसन्न होते हैं तो हमें हमेशा मीठा ही बोलना चाहिए। मीठे वचन बोलने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। 

4. पिबन्ति नद्यः स्वयमेव नाम्भः। 
   स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षाः। 
  नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहाः 
  परोपकाराय सतां विभूतयः ॥       -सुभाषितरत्नभाण्डागारम्  
शब्दार्थाः- नद्यः- नदियाँ , की भलाई के लिए । अम्भ : -पानी पिबन्ति - पीती हैं , वृक्षाः पेड़ , खादन्ति खाते हैं , खलु - निश्चित हो वारिवाहा : - बादल , सस्य -अनाज , अदन्ति- खाते हैं , सता - सज्जना की , विभूतयः- धन - संपत्ति , परोपकाराय - दूसरों की भलाई के लिए। 
अर्थ- नदियों अपना पानी स्वयं नहीं पीतीं। पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते, निश्चित ही बादल अनाज (फसल) का नहीं खाते (इसी प्रकार) सज्जनों (श्रेष्ठ लोगों) की धन- सम्पत्तियाँ दूसरों के लिए ही होती हैं। 

5. गुणेष्वेव हि कर्तव्यः प्रयत्नः पुरुषैः सदा। 
    गुणयुक्तो दरिद्रोऽपि नेश्वरैरगुणैः समः ॥  - मृच्छकटिकम् 
शब्दार्थाः- गुणेषु- गुणों में. प्रयत्नः कोशिश , पुरुषै : - पुरुषों के द्वारा कर्तव्यः- करना चाहिए , हि - निश्चित ही , सदा - हमेशा , गुणयुक्तः- गुणवान् , दरिद्रः- गरीब , अपि - भी, ईश्वर : -ऐश्वर्यशाली , समः- समान , न - नहीं, गुणैः - गुणों से 
अर्थ- मनुष्य को सदा गुणों को ही प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। गरीब होता हुआ भी वह गुणवान व्यक्ति ऐश्वर्यशाली गुणहीन के समान नहीं हो सकता (अर्थात् वह उससे कहीं अधिक श्रेष्ठ होता है।)

6.आरम्भगुर्वी क्षयिणी क्रमेण 
   लध्वी पुरा वृद्धिमती च पश्चात्। 
   दिनस्य पूर्वार्द्धपरार्द्धभिन्ना 
  छायेव मैत्री खलसज्जनानाम्॥    -नीतिशतकम् 
शब्दार्था : - आरम्भगुर्वी- आरंभ में लंबी , क्रमेण- धीरे-धीरे , क्षयिणी - घटते स्वभाव वाली , पुरा-पहले , लघ्वी - छोटी , वृद्धिमती - लंबी होती हुई , पूर्वार्द्ध - पूर्वाह्न , अपरार्द्ध - अपराह्न , छायेव - छाया के समान, भिन्ना- अलग-अलग , खल- दुष्ट , सज्जनानाम्- सज्जनों की । 
अर्थ- आरंभ में लंबी फिर धीरे-धीरे छोटी होने वाली तथा पहले छोटी फिर धीरे-धीरे बढ़ने वाली पूर्वाह्न तथा अपराह्न काल की छाया की तरह दुष्टों और सज्जनों की मित्रता अलग-अलग होती है।

7. यत्रापि कुत्रापि गता भवेयु 
   हंसा महीमण्डलमण्डनाय । 
   हानिस्तु तेषां हि सरोवराणां 
   येषां मरालैः सह विप्रयोगः ॥ - भामिनीविलास
शब्दार्था: - महीमण्डल- पृथ्वी , मण्डनाय- सुशोभित करने के लिए , गता : - चले जाने वाले भवयु होने मराले : हंसों से , हंसा - हंस , सरोवराणां- तालाबों का , विप्रयोगः - अलग होना , हानि : - हानि , सह- साथ, तेषां- उनका, येषां- उनका । 
अर्थ- पृथ्वी को सुशोभित करने वाले हंस भूमण्डल में (इस पृथ्वी पर) जहाँ कहाँ (सर्वत्र) भी प्रवेश करने में समर्थ हानि तो उन सरोवरों की ही है, जिनका हंसों से वियोग (अलग होना) हो जाता है। 

8.  गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति
     ते निर्गुण प्राप्य भवन्ति दोषाः। 
    आस्वाद्यतोयाः प्रवहन्ति नद्यः 
     समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेयाः।।   - हितोपदेशः

शब्दार्था: - गुणज्ञेषु - गुणों को जानने वालों में गुणवान ) निर्गुणगुणहीन , दोषा : - दुर्गुण , आस्वाद्यतायाः स्वादयुक्त जलवाली , आसाद्य- प्राप्त करके , प्रवहन्ति - बहती हैं , नद्यः - नदियाँ , अपेयाः न पीने योग्य, प्राप्य- प्राप्त करके,भवन्ति-हो जाती हैं ।  
अर्थ- गुणवान लोगों में रहने के कारण ही गुणों को सगुण कहा जाता है। गुणहीन को प्राप्त करके व दुर्गुण (दोष) बन जाते हैं । जिस प्रकार नदियाँ स्वादयुक्त जलवाली होती हैं, परंतु समुद्र को प्राप्त करके न पीने योग्य अर्थात् ( कुस्वादु, या नमकीन ) हो जाती हैं। 

Monday, 8 November 2021

MCQ Based On Arth Ke Aadhar Par Vakay Bhed/अर्थ के आधार पर वाक्य भेद पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न 
1.'जिन वाक्यों से किसी वास्तु या व्यक्ति के बारे में प्रश्न पूछकर उसके बारे में जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की जाती है।' वहाँ अर्थ की दृष्टि से कौन सा वाक्य भेद होता है -
(i) संदेह वाचक वाक्य
(ii) संकेत वाचक वाक्य
(iii) इच्छा वाचक वाक्य
(iv) प्रश्न वाचक वाक्य
 उत्तर-(iv) प्रश्न वाचक वाक्य

2 'वह शिमला गया होगा।' इस वाक्य में अर्थ के आधार पर वाक्य का भेद है-
(i) विधान वाचक वाक्य
(ii) संदेह वाचक वाक्य
(iii) प्रश्न वाचक वाक्य
(iv) आज्ञा वाचक वाक्य
उत्तर-(ii) संदेह वाचक वाक्य

3' क्या सभी सकुशल वापिस आएँगे? ' इस वाक्य को 'इच्छा वाचक' वाक्य में बदल कर लिखिए -
(i) अरे ! क्या सभी सकुशल वापिस आएँगे?
(ii) सभी सकुशल वापिस आ गए।
(iii) भगवान करें सभी सकुशल वापिस आए।
(iv) शायद सभी सकुशल वापिस आ गए होंगे।
 उत्तर-(iii) भगवान करें सभी सकुशल वापिस आए।

4  पड़ोसी का पुत्र विद्यालय में पढ़ता है। ' इस वाक्य में उद्देश्य और विधेय छाँट कर लिखिए -
(i) उद्देश्य - पड़ोसी का पुत्र, विधेय - विद्यालय में पढ़ता है
(ii) उद्देश्य - विद्यालय में पढ़ता है, विधेय - पडोसी का पुत्र
(iii) उद्देश्य - पडोसी का, विधेय - पढ़ता है
(iv) उद्देश्य - विद्यालय में, विधेय - पडोसी का पुत्र
उत्तर-(i) उद्देश्य - पड़ोसी का पुत्र, विधेय - विद्यालय में पढ़ता है

 5. 'मैं आज विद्यालय अवश्य जाऊँगा।' इस वाक्य को निषेध वाचक वाक्य में कैसे लिखा जाएगा -
(i) क्या मैं आज विद्यालय अवश्य जाऊँगा।
(ii) अरे ! मैं आज विद्यालय अवश्य जाऊँगा।
(iii) मैं आज विद्यालय नहीं जाऊँगा।
(iv) मैं आज विद्यालय क्यों जाऊँगा।
 उत्तर-(iii) मैं आज विद्यालय नहीं जाऊँगा।
        
6. 'हो सकता है वह बाजार गया हो।' इस वाक्य में अर्थ के आधार पर वाक्य भेद है-
(i) विधान वाचक वाक्य
(ii) संदेह वाचक वाक्य
(iii) प्रश्न वाचक वाक्य
(iv) आज्ञा वाचक वाक्य
 उत्तर-(ii) संदेह वाचक वाक्य

7. 'क्या वह पढ़ाई में इतना अधिक कमजोर है।' इस वाक्य को ' निषेध वाचक ' वाक्य में बदल कर लिखिए -
(i) अरे ! क्या वह पढ़ाई में इतना अधिक कमजोर है।
(ii) शायद वह पढ़ाई में बहुत अधिक कमजोर है।
(iii) वह पढ़ाई में इतना अधिक कमजोर नहीं है।
(iv) आह ! वह पढ़ाई में इतना अधिक कमजोर है।
 उत्तर-(iii) वह पढ़ाई में इतना अधिक कमजोर नहीं है।

8. ' अनुराधा एक अध्यापिका है। ' इस वाक्य में उद्देश्य और विधेय छाँट कर लिखिए -
(i) उद्देश्य - एक अध्यापिका है, विधेय - अनुराधा
(ii) उद्देश्य - अनुराधा, विधेय - एक अध्यापिका है
(iii) उद्देश्य - है, विधेय - अनुराधा
(iv) उद्देश्य - अध्यापिका, विधेय - है
 उत्तर-(ii) उद्देश्य - अनुराधा, विधेय - एक अध्यापिका है

9.'आज मौसम बिगड़ा हुआ है। ' इस वाक्य को संदेह वाचक वाक्य में कैसे लिखा जाएगा -
(i) क्या आज मौसम बिगड़ा हुआ है।
(ii) अरे ! आज मौसम बिगड़ा हुआ है।
(iii) आज मौसम बिगड़ सकता है।
(iv) आज मौसम बिगड़ा हुआ क्यों है।
 उत्तर-(iii) आज मौसम बिगड़ सकता है।

10. 'तुम्हारे पिता जी शहर के सबसे अच्छे वकील हैं। ' इस वाक्य को प्रश्न वाचक वाक्य में बदलिए -
(i) क्या तुम्हारे पिता जी शहर के सबसे अच्छे वकील हैं ?
(ii) शायद तुम्हारे पिता जी शहर के सबसे अच्छे वकील हैं।
(iii) अरे ! तुम्हारे पिता जी शहर के सबसे अच्छे वकील हैं।
(iv) तुम्हारे पिता जी शहर के सबसे अच्छे वकील नहीं हैं।
 उत्तर-(i) क्या तुम्हारे पिता जी शहर के सबसे अच्छे वकील हैं ?

11. ' फसल को पानी मिलेगा, तो उपज अच्छी होगी। ' यह वाक्य किस प्रकार का वाक्य है -
(i) आज्ञा वाचक वाक्य
(ii) संकेत वाचक वाक्य
(iii) इच्छा वाचक वाक्य
(iv) विस्मयादिबोधक वाक्य
 उत्तर-(ii) संकेत वाचक वाक्य

12. ' ऐसे वाक्य जिनमें आदेश, आज्ञा या अनुमति का पता चले या बोध हो' वहाँ अर्थ की दृष्टि से वाक्य भेद होता है -
(i) आज्ञा वाचक वाक्य
(ii) संकेत वाचक वाक्य
(iii) इच्छा वाचक वाक्य
(iv) विस्मयादिबोधक वाक्य
 उत्तर-(i) आज्ञा वाचक वाक्य

13. 'भगवान करें तुम्हें तुम्हारे बुरे कर्मों का फल जरूर मिले।' इस वाक्य में अर्थ के आधार पर वाक्य का भेद है-
(i) विधान वाचक वाक्य
(ii) संदेह वाचक वाक्य
(iii) इच्छा वाचक वाक्य
(iv) आज्ञा वाचक वाक्य
 उत्तर-(iii) इच्छा वाचक वाक्य

14. 'सैनिकों को आगे बढ़ना चाहिए।' इस वाक्य को 'आज्ञा वाचक' वाक्य में बदल कर लिखिए -
(i) शायद सैनिकों को आगे बढ़ना चाहिए।
(ii) क्या सैनिकों को आगे बढ़ना चाहिए।
(iii) सैनिकों , आगे बढ़ो।
(iv) सैनिकों को आगे नहीं बढ़ना चाहिए।
उत्तर-(iii) सैनिकों, आगे बढ़ो।
 
15. 'ये दूर से आते हुए वृद्ध मेरे दादा जी हैं।' इस वाक्य में उद्देश्य और विधेय छाँट कर लिखिए -
(i) उद्देश्य - मेरे दादा जी हैं, विधेय - ये दूर से आते हुए वृद्ध
(ii) उद्देश्य - ये दूर से आते हुए वृद्ध , विधेय - मेरे दादा जी हैं
(iii) उद्देश्य -  वृद्ध, विधेय - मेरे दादा जी हैं
(iv) उद्देश्य - दादा जी, विधेय - ये दूर से आते हुए वृद्ध
 उत्तर-(ii) उद्देश्य - ये दूर से आते हुए वृद्ध , विधेय - मेरे दादा जी हैं

16. 'आप बहुत ही सुंदर लिखती हैं।' इस वाक्य को विस्मयादिवाचक वाक्य में कैसे लिखा जाएगा -
(i) आप बहुत सुंदर नहीं लिखती हैं।
(ii) आप बहुत सुंदर क्यों नहीं लिखती हैं।
(iii) अरे वाह ! आप बहुत ही सुंदर लिखती हैं।
(iv) शायद आप थोड़ा - बहुत सुंदर लिख लेती हैं।
 उत्तर-(iii) अरे वाह ! आप बहुत ही सुंदर लिखती हैं।

17. 'आप मेरे साथ बगीचे में घूमने चलेंगी।' इस वाक्य को प्रश्न वाचक वाक्य में बदलिए -
(i) शायद आप मेरे साथ बगीचे में घूमने चलना पसंद करेंगी।
(ii) क्या आप मेरे साथ बगीचे में घूमने चलेंगी ?
(iii) अरे ! आप मेरे साथ बगीचे में घूमने चलेंगी।
(iv) आप मेरे साथ बगीचे में घूमने क्यों नहीं चलेंगी।
 उत्तर-(ii) क्या आप मेरे साथ बगीचे में घूमने चलेंगी ?

18. 'हे राम ! तुमने मेरे दोस्त के साथ इतना बुरा क्यों किया।' यह वाक्य किस प्रकार का वाक्य है -
(i) आज्ञा वाचक वाक्य
(ii) संकेत वाचक वाक्य
(iii) इच्छा वाचक वाक्य
(iv) विस्मयादिबोधक वाक्य
उत्तर-(iv) विस्मयादिबोधक वाक्य

19. 'वे वाक्य जिनसे हमें एक क्रिया का दूसरी क्रिया पर निर्भर होने का बोध हो।' वहाँ अर्थ की दृष्टि से कौन सा वाक्य भेद होता है -
(i) संदेह वाचक वाक्य
(ii) संकेत वाचक वाक्य
(iii) इच्छा वाचक वाक्य
(iv) निषेधात्मक वाक्य
 उत्तर-(ii) संकेत वाचक वाक्य

20. 'शायद आज राम अभी तक स्कूल नहीं पहुँचा होगा। ' इस वाक्य में अर्थ के आधार पर वाक्य का कौन-सा वाक्य भेद है ?
(i) विधान वाचक वाक्य
(ii) संदेह वाचक वाक्य
(iii) प्रश्न वाचक वाक्य
(iv) आज्ञा वाचक वाक्य
उत्तर-(ii) संदेह वाचक वाक्य

21. 'जल्दी उठने पर बस नहीं छूटती।' इस वाक्य को 'संकेत वाचक' वाक्य में बदल कर लिखिए -
(i) जल्दी उठने पर बस कैसे नहीं छूटती ?
(ii) अरे ! जल्दी उठने पर बस नहीं छूटती।
(iii) शायद जल्दी उठने पर बस नहीं छूटती।
(iv) थोड़ा जल्दी उठ जाते, तो बस नहीं छूटती।
 उत्तर-(iv) थोड़ा जल्दी उठ जाते, तो बस नहीं छूटती।

22. ' यहाँ लाल-पीले फूल खिले हुए हैं।' इस वाक्य में उद्देश्य और विधेय छाँट कर लिखिए -
(i) उद्देश्य - लाल-पीले फूल , विधेय - यहाँ खिले हुए हैं
(ii) उद्देश्य - यहाँ लाल-पीले , विधेय - खिले हुए हैं
(iii) उद्देश्य - लाल - पीले , विधेय -  खिले हुए हैं
(iv) उद्देश्य - फूल हैं , विधेय - यहाँ खिले हुए
 उत्तर-(ii) उद्देश्य - यहाँ लाल-पीले , विधेय - खिले हुए हैं

23.'आज वह फ़िल्म टी.वी.पर आएगी। ' इस वाक्य को निषेध वाचक वाक्य में किस तरह  लिखा जाएगा -
(i) क्या आज वह फ़िल्म टी.वी.पर आएगी।
(ii) अरे ! आज वह फ़िल्म टी.वी.पर आएगी।
(iii) आज वह फ़िल्म टी.वी.पर क्यों आएगी ?
(iv) आज वह फ़िल्म टी.वी.पर नहीं आएगी।
 उत्तर-(iv) आज वह फ़िल्म टी.वी.पर नहीं आएगी।
24. ' तुम्हारी बहन काम करती है। ' इस वाक्य को प्रश्न वाचक वाक्य में बदलिए -
(i) तुम्हारी बहन कुछ काम करती है।
(ii) शायद तुम्हारी बहन कुछ काम करती है।
(iii) अरे ! तुम्हारी बहन काम करती है।
(iv) तुम्हारी बहन क्या काम करती है ?
 उत्तर-(iv) तुम्हारी बहन क्या काम करती है ?

25. 'देश में अपराधियों का खौफ़ शायद अभी भी है। ' यह वाक्य किस प्रकार का वाक्य है -
(i) आज्ञा वाचक वाक्य
(ii) संदेह वाचक वाक्य
(iii) इच्छा वाचक वाक्य
(iv) विस्मयादिबोधक वाक्य
 उत्तर-(ii) संदेह वाचक वाक्य

26. ' ऐसे वाक्य जिनमें हमें आश्चर्य, शोक, घृणा, अत्यधिक ख़ुशी, स्तब्धता आदि भावों का बोध हो' वहाँ अर्थ की दृष्टि से कौन सा वाक्य भेद होता है -
(i) संदेह वाचक वाक्य
(ii) संकेत वाचक वाक्य
(iii) विस्मयादिबोधक वाक्य
(iv) प्रश्न वाचक वाक्य
 उत्तर-(iii) विस्मयादिबोधक वाक्य

27. ' हिमालय भारत के उत्तर दिशा में स्थित है। ' इस वाक्य में अर्थ के आधार पर वाक्य का कौन-सा वाक्य भेद है ?
(i) विधान वाचक वाक्य
(ii) संदेह वाचक वाक्य
(iii) प्रश्न वाचक वाक्य
(iv) आज्ञा वाचक वाक्य
उत्तर-(i) विधान वाचक वाक्य

28. ' रमन आज जरूर खेलने आएगा।' इस वाक्य को ' निषेध वाचक ' वाक्य में बदल कर लिखिए -
(i) अरे ! रमन आज जरूर खेलने आएगा।
(ii) रमन आज खेलने नहीं आएगा।
(iii) भगवान्करे रमन आज जरूर खेलने आए।
(iv) शायद रमन आज जरूर खेलने आएगा।
 उत्तर-(ii) रमन आज खेलने नहीं आएगा।

29. ' तुम यहाँ आओ। ' इस वाक्य में उद्देश्य और विधेय छाँट कर लिखिए -
(i) उद्देश्य - तुम , विधेय - यहाँ आओ
(ii) उद्देश्य - तुम , विधेय - आओ
(iii) उद्देश्य - यहाँ आओ , विधेय - तुम
(iv) उद्देश्य - यहाँ , विधेय - आओ
 उत्तर-(i) उद्देश्य - तुम , विधेय - यहाँ आओ

30. 'राधा तुम डांस करोगी। ' इस वाक्य को प्रश्न वाचक वाक्य में कैसे लिखा जाएगा -
(i) शायद राधा तुम डांस करोगी।
(ii) अरे ! राधा तुम डांस करोगी।
(iii) हे भगवान् राधा तुम डांस करोगी।
(iv) राधा तुम कब डांस करोगी ?
 उत्तर-(iv) राधा तुम कब डांस करोगी ?

 31.' रामायण के आज के भाग में रावण सीता का अपहरण नहीं करेगा। ' इस वाक्य में अर्थ के आधार पर वाक्य भेद है -
(i) विधान वाचक वाक्य
(ii) संदेह वाचक वाक्य
(iii) निषेध वाचक वाक्य
(iv) आज्ञा वाचक वाक्य
उत्तर- (iii) निषेध वाचक वाक्य

32. ' क्या वह आज श्री लंका जाने वाला है।' इस वाक्य को 'निषेधवाचक' वाक्य में बदल कर लिखिए -
(i) अरे ! क्या वह आज श्री लंका जाने वाला है।
(ii) शायद वह आज श्री लंका जाने वाला है।
(iii) क्या वह आज श्री लंका नहीं जाने वाला है।
(iv) आह ! वह आज श्री लंका जाने वाला है।
 उत्तर-(iii) क्या वह आज श्री लंका नहीं जाने वाला है।

33.' सुमन मेरी पक्की सहेली है।' इस वाक्य में उद्देश्य और विधेय छाँट कर लिखिए -
(i) उद्देश्य - मेरी पक्की सहेली है, विधेय - सुमन
(ii) उद्देश्य - सुमन, विधेय - मेरी पक्की सहेली है
(iii) उद्देश्य - है , विधेय - सुमन
(iv) उद्देश्य - पक्की सहेली, विधेय - है
उत्तर-(ii) उद्देश्य - सुमन, विधेय - मेरी पक्की सहेली है

34. 'आज भारी बारिश हो रही है।' इस वाक्य को संदेह वाचक वाक्य में कैसे लिखा जाएगा -
(i) क्या आज भारी बारिश हो रही है।
(ii) अरे ! आज भारी बारिश हो रही है।
(iii) आज भारी बारिश हो सकती है।
(iv) आज भारी बारिश नहीं होनी चाहिए।
 उत्तर-(iii) आज भारी बारिश हो सकती है।

35. ' श्याम तुम्हारी कक्षा का सबसे अच्छा लड़का है।' इस वाक्य को प्रश्न वाचक वाक्य में बदलिए -
(i) क्या श्याम तुम्हारी कक्षा का सबसे अच्छा लड़का है ?
(ii) शायद श्याम तुम्हारी कक्षा का सबसे अच्छा लड़का है।
(iii) अरे ! श्याम तुम्हारी कक्षा का सबसे अच्छा लड़का है।
(iv) श्याम तुम्हारी कक्षा का सबसे अच्छा लड़का नहीं है।
 उत्तर-(i) क्या श्याम तुम्हारी कक्षा का सबसे अच्छा लड़का है ?

36. ' फूलों को समय पर पानी मिलेगा, तो अधिक समय तक खिले रहेंगे। ' यह वाक्य किस प्रकार का वाक्य है 
(i) आज्ञावाचक वाक्य
(ii) संकेतवाचक वाक्य
(iii) इच्छावाचक वाक्य
(iv) विस्मयादिबोधक वाक्य
 उत्तर-(ii) संकेतवाचक वाक्य

37. 'जिस वाक्य के द्वारा किसी काम का करना या स्थिति का होना पाया जाए या एक सरल वाक्य, जिसमें कर्ता, कर्म और क्रिया हो' वहाँ अर्थ की दृष्टि से वाक्य भेद होता है -
(i) विधान वाचक वाक्य
(ii) संकेत वाचक वाक्य
(iii) इच्छा वाचक वाक्य
(iv) विस्मयादिबोधक वाक्य
 उत्तर-(i) विधान वाचक वाक्य

38. ' सीता बहुत अच्छी लड़की है और मैं प्रार्थना करता हूँ कि उसे अच्छा लड़का मिले। ' इस वाक्य में अर्थ के आधार पर वाक्य का कौन-सा वाक्य भेद है ?
(i) विधान वाचक वाक्य
(ii) संदेह वाचक वाक्य
(iii) इच्छा वाचक वाक्य
(iv) आज्ञा वाचक वाक्य
उत्तर-(iii) इच्छा वाचक वाक्य

39. 'बच्चों को बड़ों की आज्ञा का पालन करना चाहिए।' इस वाक्य को 'आज्ञा वाचक' वाक्य में बदलकर लिखिए -
(i) शायद बच्चों को बड़ों की आज्ञा का पालन करना चाहिए।
(ii) क्या बच्चों को बड़ों की आज्ञा का पालन करना चाहिए।
(iii) बच्चों, बड़ों की आज्ञा का पालन करो।
(iv) बच्चों को बड़ों की आज्ञा का पालन नहीं करना चाहिए।
 उत्तर-(iii) बच्चों, बड़ों की आज्ञा का पालन करो।

40. 'रसोई घर में काम करने वाली महिला मेरी माता जी हैं।' इस वाक्य में उद्देश्य और विधेय छाँटकर लिखिए -
(i) उद्देश्य - मेरी माता जी हैं, विधेय - रसोई घर में काम करने वाली महिला
(ii) उद्देश्य - रसोई घर में काम करने वाली महिला, विधेय - मेरी माता जी हैं
(iii) उद्देश्य - हैं,  विधेय - मेरी माता जी हैं
(iv) उद्देश्य - माता जी, विधेय - रसोई घर में काम करने वाली महिला 
उत्तर-(ii) उद्देश्य - रसोई घर में काम करने वाली महिला, विधेय - मेरी माता जी हैं

41. शायद आज वर्षा हो । 
(i) विधानवाचक 
(ii) संदेहवाचक 
(iii) इच्छावाचक
(iv) प्रश्नवाचक
उत्तर-(ii) संदेहवाचक

42. आज तुम्हारे साथ कौन था ? 
(i) नकारात्मक
(ii) प्रश्नवाचक
(iii) आज्ञावाचक
(iv) विस्मयवाचक 
उत्तर-(ii) प्रश्नवाचक

43. रमा पुस्तक पढ़ रही है । 
(i) विधानवाचक 
(ii) आज्ञावाचक  
(iii) इच्छावाचक 
(iv) संदेहवाचक 
 उत्तर-(i) विधानवाचक

44. मैं कल नहीं आऊँगा । 
(i) निषेधवाचक 
(ii) संकेतवाचक 
(iii) विस्मयादिवाचक 
(iv) इच्छावाचक   
उत्तर-(i) निषेधवाचक

45. शाम तक जरूर आ जाना । 
(i) इच्छावाचक 
(ii) आज्ञावाचक
(iii) संकेतवाचक 
(iv) विधानवाचक 
उत्तर-(ii) आज्ञावाचक

46. अगर वे आ जाते तो मेरा काम बन जाता। 
(i) संकेतवाचक 
(ii) संदेहवाचक 
(iii) इच्छावाचक 
(iv) विस्मयवाचक 
उत्तर-(i) संकेतवाचक

47.आपकी यात्रा शुभ हो। 
(i) प्रश्नवाचक  
(ii) इच्छावाचक
(iii) निषेधवाचक 
(iv) आज्ञावाचक
उत्तर-(ii) इच्छावाचक

48. छि! कितनी गंदगी है । 
(i) नकारात्मक 
(ii) आज्ञावाचक 
(iii) इच्छावाचक
(iv) विस्मयवाचक  
उत्तर-(iv) विस्मयवाचक

49. बच्चे निबन्ध लिख रहे होंगे । 
(i) संकेतवाचक । 
(ii) संदेहवाचक
(iii) इच्छावाचक 
(iv) आज्ञावाचक 
उत्तर-(ii) संदेहवाचक

50.अरे ! बारिश हो रही है। 
(i) संकेतवाचक 
(ii) संकेतवाचक 
(iii) विस्मयवाचक 
(iv) प्रश्नवाचक 
उत्तर-(iii) विस्मयवाचक 
 

MCQ Based On Shabad-Pad/शब्द और पद पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न

HINDI NCERT SOLUTIONS CLASS 8, 9,10 SPARSH
बहुविकल्पीय प्रश्न 
1. भाषा की मूल इकाई ----------- कहलाती है । 
(i) वर्ण 
(ii) शब्द 
(iii) अक्षर 
(iv) उच्चारण 
उत्तर-(i) वर्ण 

2. हिंदी भाषा में प्रयुक्त सबसे --------------- वर्ण कहलाती है। 
(i) बड़ी इकाई 
(ii) इकाई 
(iii) छोटी इकाई 
(iv) सामान्य इकाई 
उत्तर-(iii) छोटी इकाई  

3. वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते हैं जिसके--------------नहीं किए जा सकते। 
(i) खंड 
(ii) शब्द 
(iii) उच्चारण 
(iv) प्रयोग 
उत्तर-(i) खंड  

4. वाक्य में प्रयुक्त शब्द कहलाते हैं । 
(i) पदबंध 
(ii) पद 
(iii) संज्ञा
(iv) सर्वनाम 
उत्तर-(ii) पद  

5. एक या अधिक अक्षरों से बनी हुई स्वतंत्र, सार्थक ध्वनि ------------ कहलाती है । 
(i) पदबंध  
(ii) पद 
(iii) संज्ञा  
(iv) शब्द  
उत्तर- (iv) शब्द

6.शब्द----------- में पाए जाते हैं। 
(i) पुस्तक 
(ii) वाक्य 
(iii) वर्ण 
(iv) शब्दकोश 
उत्तर- (iv) शब्दकोश 

7.---------------भाषा की वाक्य में प्रयुक्त होने वाली एक इकाई है । 
(i) संज्ञा 
(ii) पद 
(iii) सर्वनाम
(iv) वर्ण 
उत्तर-(ii) पद
 
8.वाक्य ------------ से मिलकर बनते है । 
(i) शब्द
(ii) वर्ण 
(iii) अक्षर 
(iv) पद 
उत्तर-(i) शब्द
 
9. वाक्य में प्रयुक्त शब्द की आकृति और रूप में परिवर्तन----------- लगाकर किया जाता है। 
(i) मात्रा 
(ii) विभक्ति
(iii) वर्ण-समूह 
(iv) अक्षर  
उत्तर-(ii) विभक्ति 

10.---------------व्याकरण के नियमों से परे होते हैं । 
(i) शब्द 
(ii) वर्ण 
(iii) मात्रा 
(iv) संज्ञा 
उत्तर-(i) शब्द 
 
11.'राधा नाच रही है ।' में ' राधा ' है-
(i) वर्ण 
(ii) पद 
(iii) वाक्य 
(iv) शब्द 
 उत्तर- (ii) पद

12.'शहर, बादल , सागर' है-
(i) पद 
(ii) वर्ण 
(iii) वाक्य 
(iv) शब्द 
 उत्तर- (iv) शब्द

13.शब्दों के मेल से क्या बनता है ? 
(i) पद 
(ii) वाक्य 
(iii) वर्ण 
(iv) ध्वनि
उत्तर- (ii) वाक्य

14. 'मोहन जा रहा है । में ' मोहन ' है-
(i) पद 
(ii) शब्द 
(iii) वाक्य 
(iv) वर्ण
उत्तर- (i) पद 

15. जब कोई शब्द पद का रूप ले लेता है, तो-
(i) शब्द पद नहीं बन सकता । 
(ii)  उन पर व्याकरण नियमों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। 
(iii) स्वतन्त्र रहने के कारण उस पर व्याकरण के नियम लागू नहीं होते । 
(iv) शब्दों की स्वतन्त्रता समाप्त हो जाती है और वह व्याकरण के नियमों में बँध जाता है। 
उत्तर-(iv) शब्दों की स्वतन्त्रता समाप्त हो जाती है और वह व्याकरण के नियमों में बँध जाता है। 
 
16. व्याकरणिक नियमों में बँधकर शब्द जब वाक्य में प्रयुक्त होता है, तब वह कहलाता है-
(i) शब्द  
(ii) पद  
(iii) वाक्य 
(iv) इनमें से कोई नहीं । 
उत्तर-(ii) पद 
 
17. शब्द किसके मेल से बनते हैं ? 
(i) भाषा के 
(ii) वर्णों के 
(iii) पद के 
(iv) वाक्य के
उत्तर-(ii) वर्णों के
  
18. वाक्य किससे बनता है ? 
(i) स्वरों से 
(ii) व्यंजनों से 
(iii) शब्दों से 
(iv) पदों से 
उत्तर- (iii) शब्दों से 

19. वर्णों का स्वतन्त्र व सार्थक समूह कहलाता है -
(i) वाक्य 
(ii) शब्द 
(iii) स्वर 
(iv) अनुच्छेद |
उत्तर- (ii) शब्द 

20.अर्थ के आधार पर शब्द होते हैं-
(i) सार्थक 
(ii) निरर्थक 
(iii) तत्सम 
(iv) (i) व (ii) दोनों । 
उत्तर-(iv) (i) व (ii) दोनों । 
 
21. शब्द व्याकरणिक नियमों में बँधकर क्या बन जाता है ? 
(i) वाक्य 
(ii) वर्ण 
(iii) पद 
(iv) इनमें से कोई नहीं ।  
उत्तर-(iii) पद 
 
22. 'सागर, मदन, गुलाब' क्या हैं ? 
(i) पद 
(ii) वाक्य |
(iii) वर्ण 
(iv) शब्द 
उत्तर- (iv) शब्द

23. निम्न में से किसका व्याकरणिक परिचय होता है ? 
(i) शब्द 
(ii) पद  
(iii) स्वर 
(iv) वर्ण 
उत्तर- (ii) पद

24. -----------वाक्य का वचन, लिंग, क्रिया काव्य से किसी भी  प्रकार का कोई संबंध नहीं होता।
(i) शब्द 
(ii) पद 
(iii) पदबंध 
(iv) वाक्य
 उत्तर-(i) शब्द 
 
 25.राम बाजार गया में रेखांकित 'बाजार' है । 
(i) पद 
(ii) शब्द 
(iii) वर्ण 
(iv) वाक्यांश 
उत्तर- (i) पद 

Sunday, 7 November 2021

Shabad Or Pad/शब्द और पद

HINDI NCERT SOLUTIONS CLASS 8, 9,10 SPARSH
शब्द और पद की परिभाषा 
स्वतंत्र और सार्थक ध्वनि-समूह 'शब्द' कहलाता है। ऐसा स्वतंत्र वर्ण समूह, जिसका कोई एक निश्चित अर्थ हो, शब्द है। 
जैसे- घर, कुसुम, स्कूल, कमल, सुंदर आदि वर्ण-समूह तभी शब्द कहलाता है, जब उसका कोई अर्थ हो। बिना अर्थ वाला वर्णसमूह कभी भी शब्द नहीं हो सकता। 
जैसे- 'नक' कोई शब्द नहीं है क्योंकि इस समूह का कोई अर्थ नहीं है किंतु 'नक' के स्थान पर 'नाक' कहते ही यह वर्ण-समूह शब्द बन जाता है। इसका अर्थ अपने-आप में स्वतंत्र है। यह शब्द हिंदी शब्द-कोश में भी है। 
शब्द का महत्त्व-  किसी भी भवन की ईटों की तरह होते हैं । जिस प्रकार ईंट से भवन का निर्माण होता है उसी प्रकार शब्दों से भाषा रूपी भवन का निर्माण होता है । शब्दों से ही वाक्य बनते हैं तभी उनसे उचित अर्थ निकलता है।
 एक ध्वनि से अथवा अनेक ध्वनियों के मेल से अक्षर बनते हैं, तो एक या अनेक अक्षरों के समूह से शब्द। भारत, सुंदर, यमुना, वहाँ, और, कि,  है, पानी आदि शब्द है। 
इन सभी से किसी अर्थ की अभिव्यक्ति हो रही है, अतः सभी सार्थक शब्द है जबकि रतभा , वानी , खटू आदि अक्षरों के समूह तो है परंतु शब्द नहीं है, क्योंकि इनसे किसी अर्थ की अभिव्यक्ति नहीं होती ; अतः ये निरर्थक शब्द है।
 शब्द की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं -
 (क) शब्द से किसी अर्थ की अभिव्यक्ति होती है। 
(ख) शब्द वर्षों के समूह से बनते हैं। 
(ग) ये वाक्य में प्रयुक्त होकर हमारे विचारों को प्रकट करते हैं। 
(घ) वाक्य में ये निश्चित कार्य करते हैं जिनके आधार पर हम इन्हें संज्ञा , सर्वनाम , क्रिया , विशेषण आदि शब्द-भेदों में बाँट सकते हैं। 
वर्गों के मेल से बना स्वतंत्र सार्थक ध्वनि-समूह जो वाक्य में प्रयुक्त होकर हमारे विचारों को प्रकट करता है, 'शब्द' कहलाता है। 
शब्द और पद  
प्रत्येक स्वतंत्र सार्थक वर्ण-समूह 'शब्द' कहलाता है पर जब उसका प्रयोग वाक्य में होता है, तो वह स्वतंत्र नहीं रहता बल्कि व्याकरण के नियमों ( कारक, वचन, लिंग आदि ) में बँध जाता है और उसका रूप भी बदल जाता है। तब वे 'शब्द' न रहकर 'पद' बन जाते हैं। 
जैसे - लड़का , कविता , सुनाना- तीनों शब्द हैं परंतु नीचे दिए गए वाक्य में प्रयुक्त पर शब्द न रहकर ये पद बन गए हैं क्योंकि व्याकरण के नियमों के अनुसार इनका रूप बदल गया है । 
'लड़कों ने कविताएँ सुनाई।'
शब्द-कोश में शब्द होते हैं, पद नहीं । 
शब्द और पद में अंतर 
'शब्द' जब वाक्य में प्रयुक्त होते हैं 'पद' बन जाते हैं। कोई भी शब्द जब तक कोश में रहता है शब्द कहलाता है। 
जब वह वाक्य में प्रयुक्त होता है तो विभक्तियों से युक्त होकर 'पद' कहा जाता है । जैसे - 'बालिका' एक स्त्रीलिंग शब्द है । शब्द-कोश में इसका एक निश्चित अर्थ होता है किंतु जब इसका प्रयोग में किया जाता है तो इसके रूप में परिवर्तन हो जाता है। 

1.ध्वनियों का समूह शब्द है, जो स्वतंत्र होते हैं और वाक्य में इसका प्रयोग वाक्य में प्रयुक्त हो जाते हैं , ये पद कहलाने लग जाते हैं । उदाहरण के लिए मेज , पुस्तक , कमरा आदि ध्वनियों के सार्थक समूह होने के कारण शब्द है, किंतु जैस ही इन्हें वाक्य में प्रयुक्त किया जाता है, ये पद कहलाते हैं। जैसे - कमरे की मेज पर पुस्तक है इस वाक्य में 'है' वस्तुतः ' होना ' का व्याकरणिक रूप है । 
2. शब्द , शब्दकोश में पाए जाते हैं , उन्हीं का वर्णन होता है । पद भाषा की वाक्य में प्रयुक्त होने वाली एक बनते हैं । इकाई है । आम बोलचाल में कहा जाता है कि वाक्य शब्दों से बने होते हैं , किंतु वाक्य से मिलकर 
 3. वाक्य से परे शब्द अपने सामान्य रूप में रहता वाक्य में प्रयुक्त शब्द की आकृति और रूप में परिवर्तन किया जाता है। इस परिवर्तन के सहायक शब्दकोश को व्याकरण की विभक्ति कहते हैं ।
शब्द 
 वर्गों के योग से शब्द बनते हैं। 
शब्दों का प्रयोग स्वतंत्र रूप से होता है।
शब्द का मूल अर्थ एक ही होता है । 
शब्द व्याकरण के नियमों से परे होते हैं।
पद 
वाक्य में प्रयुक्त शब्द पद कहलाते है । 
सार्थक शब्द समूह में जुड़कर शब्द पद बन जाते हैं ।  
वाक्य में प्रयोगानुसार शब्दों के अर्थ में परिवर्तन आ जाता है । क्योंकि शब्द अनेकार्थी भी होते है । 
जैसे - कर , मत , कल आदि। 
शब्द जब वाक्य में प्रयुक्त अन्य शब्दों के साथ व्याकरणिक इकाई में बँध जाता है तो वह पद बन जाता है।

MCQ Based On Unseen Prose Passages /अपठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न


अपठित गद्यांश
1.जनसंख्या की वृद्धि भारत के लिए आज एक विकट समस्या बन गई है। यह समाज की सुख-संपन्नता के लिए एक भयंकर चुनौती है। महानगरों में कीड़े-मकोड़ों की भाँति अस्वास्थ्यकर घोंसलों में आदमी भरा पड़ा है। न धूप, न हवा, न पानी, न दवा। पीले-दुर्बल, निराश चेहरे। यह संकट अनायास नहीं आया है। संतान को ईश्वरीय विधान और वरदान मानने वाला भारतीय समाज ही इस रक्तबीजी संस्कृति के लिए ज़िम्मेदार है। चाहे खिलाने की रोटी और पहनाने को वस्त्र न हों, शिक्षा को शुल्क और रहने को छप्पर न हो, लेकिन अधमूर्ख, अधनंगे बच्चों की कतार खड़ी करना हर भारतीय अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझता है। यही कारणहै कि प्रतिवर्ष एक आस्ट्रेलिया यहाँ की जनसंख्या में जुड़ता चला जा रहा है, यदि इस जनवृद्धि पर नियंत्रण न हो सका तो हमारे सारे प्रयोजन और आयोजन व्यर्थ हो जाएँगे। धरती पर पैर रखने की जगह नहीं बचेगी। जब किसी समाज के सदस्यों की संख्या बढ़ती है, तो उसे उनके भरण-पोषण के लिए जीवनोपयोगी वस्तुओं की आवश्यकता पड़ती है, परंतु वस्तुओं का उत्पादन तो गणितीय क्रम से होता है और जनसंख्या रेखागणित की दर से बढ़ती है। फलस्वरूप जनसंख्या और उत्पादन-दर में चोर-सिपाही का खेल शुरू हो जाता है। आगे-आगे जनसंख्या दौड़ती है और पीछे-पीछे उत्पादन वृद्धि। वास्तविकता यह है कि उत्पादन-वृद्धि के सारे लाभ को जनसंख्या की वृद्धि व्यर्थ कर देती है। जिसके परिणामस्वरूप वस्तुएँ अलभ्य हो जाती हैं। महँगाई निरंतर बढ़ती रहती है। जीवन-स्तर गिरता जाता है। गरीबी, अशिक्षा, बेकारी बढ़ती चली जाती है। देश वहीं-का-वहीं पड़ा रहता है। 
उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्पों को चुनकर लिखिए -
क. भारत के लिए आज क्या विकट समस्या बन गई है ? 
(i) महानगर में बढ़ती जनसंख्या 
(ii) जनसंख्या की वृद्धि 
(iii) जनसंख्या का सीमित होना 
(iv) लड़कियों की घटती संख्या 
उत्तर-(ii) जनसंख्या की वृद्धि
ख. बढ़ती जनसंख्या के लिए ज़िम्मेदार कौन है ? 
(i) संतान को बुढ़ापे का सहारा मानने वाले 
(ii) सीमित परिवार वाले 
(iii) संतान को ईश्वरीय विधान और वरदान मानने वाले 
(iv) संतान को लाड़ प्यार देने वाले
उत्तर-(iii) संतान को ईश्वरीय विधान और वरदान मानने वाले 
ग. यदि इस जनवृद्धि पर नियंत्रण न हो सका तो क्या होगा ? 
(i) सारे प्रयोजन और आयोजन सफल हो जाएँगे। 
(ii) सारे प्रयोजन और आयोजन व्यर्थ हो जाएँगे। 
(iii) सारे आयोजन फिर से करने होंगे।
(iv) सारे प्रयोजन सही हो जाएँगे। 
उत्तर-(ii) सारे प्रयोजन और आयोजन व्यर्थ हो जाएँगे।
घ. समाज के सदस्यों की संख्या बढ़ने पर किस चीज़ की आवश्यकता पड़ती है ? 
(i) सभी में आपसी प्रेम और भाईचारे की 
(ii) सभी के लिए आरामदायक वस्तुओं की 
(iii) सभी के लिए जीवनोपयोगी वस्तुओं की 
(iv) सभी के लिए प्राणवायु की 
उत्तर-(iii) सभी के लिए जीवनोपयोगी वस्तुओं की
ङ. उत्पादन-वृद्धि के लाभ को कौन व्यर्थ कर देता है ? 
(i) बढ़ती जनसंख्या 
(ii) गरीबी 
(iii) बढ़ती महँगाई  
(iv) अशिक्षा
उत्तर-(i) बढ़ती जनसंख्या

2.पशु को बाँधकर रखना पड़ता है, क्योंकि वह निरंकुश है। चाहे जहाँ-तहाँ चला जाता है, इधर-उधर मुँह मार देता है। क्या मनुष्य को भी इसी प्रकार दूसरों का बंधन स्वीकार करना चाहिए ? क्या इससे उसमें मनुष्यत्व रह पाएगा। पशु के गले की रस्सी को एक हाथ में पकड़ कर और दूसरे हाथ में एक लकड़ी लेकर जहाँ चाहो हाँककर ले जाओ। जिन लोगों को इसी प्रकार हाँक जाने का स्वभाव पड़ गया है, जिन्हें कोई भी जिधर चाहे ले जा सकता है, काम में लगा सकता है, उन्हें भी पशु ही कहा जाएगा। पशु को चाहे कितना मारो, चाहे कितना उसका अपमान करो, बाद में खाने को दे दो, वह पूँछ और कान हिलाने लगेगा। ऐसे नर पशु भी बहुत से मिलेंगे जो कुचले जाने और अपमानित होने पर भी जरा-सी वस्तु मिलने पर चट संतुष्ट और प्रसन्न हो जाते हैं। कुत्ते को कितना ही ताड़ना देने के बाद उसके सामने एक टुकड़ा डाल दो, वह झट से मार-पीट को भूलकर उसे खाने लगेगा। यदि हम भी ऐसे ही हैं तो हम कौन हैं, इसे स्पष्ट कहने की आवश्यकता नहीं। पशुओं में भी कई पशु मार-पीट और अपमान को नहीं सहते। वे कई दिन तक निराहार रहते हैं, कई पशुओं ने तो प्राण त्याग दिए, ऐसा सुना जाता है। पर इस प्रकार के पशु मनुष्य-कोटि के हैं, उनमें मनुष्यत्व का समावेश है, यदि ऐसा कहा जाए तो कोई अत्युक्ति न होगी। 
क. कई पशुओं ने प्राण त्याग दिए, क्योंकि-
(i) उन्हें विद्रोह करने की अपेक्षा प्राण त्यागना उचित लगा। 
(ii) उन्हें तिरस्कृत हो जीवन जीना उचित नहीं लगा। 
(iii) वह यह शिक्षा देना चाहते थे कि प्यार, मार-पीट से अधिक कारगर है। 
(iv) वह यह दिखाना चाहते थे कि लोगों को उनकी आवश्यकता अधिक है न कि उन्हें लोगों की।
उत्तर-(ii) उन्हें तिरस्कृत हो जीवन जीना उचित नहीं लगा। 
ख. बंधन स्वीकार करने से मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ेंगे?
(i) मनुष्य सामाजिक और व्यक्तिगत रूप से कम स्वतंत्र हो जाएगा। 
(ii) मनुष्यत्व में व्यक्तिगत इच्छा व निर्णय का तत्व समाप्त हो जाएगा। 
(iii) मनुष्य बँधे हुए पशु समान हो जाएगा। 
(iv) मनुष्य की निरकुशता में परिवर्तन हो जाएगा।
उत्तर-(ii) मनुष्यत्व में व्यक्तिगत इच्छा व निर्णय का तत्व समाप्त हो जाएगा। 
ग. मनुष्यत्व को परिभाषित करने हेतु कौन-सा मूल्य अधिक महत्त्वपूर्ण है ? 
(i) स्वतंत्रता 
(ii) न्याय
(iii) शांति 
(iv) प्रेम 
उत्तर-(i) स्वतंत्रता
घ. गद्यांश के अनुसार कौन-सी उद्घोषणा की जा सकती है ? 
(i) सभी पशुओं में मनुष्यत्व है।
(ii) सभी मनुष्यों में पशुत्व है। 
(iii) मानव के लिए बंधन आवश्यक नहीं है। 
(iv) मान-अपमान की भावना केवल मानव ही समझता है।
उत्तर-(iii) मानव के लिए बंधन आवश्यक नहीं है। 
ङ. गद्यांश में नर और पशु की तुलना किन बातों को लेकर की गई है ?
(i) पिटने की क्षमता 
(ii) पूँछ कान आदि को हिलाना। 
(iii) बंधन स्वीकार करना। 
(iv) लकड़ी द्वारा हाँके जाना।
उत्तर-(iii) बंधन स्वीकार करना। 

3. वर्तमान युग कंप्यूटर युग है। यदि भारतवर्ष पर नजर दौड़ाकर देखें तो हम पाएँगे कि जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर का प्रवेश हो गया है। बैंक, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, डाक खाने, बड़े-बड़े उद्योग-कारखाने व्यवसाय हिसाब-किताब, रुपये गिनने तक की मशीनें कंप्यूटरीकृत हो गई है। अब भी यह कंप्यूटर का प्रारंभिक प्रयोग है। आने वाला समय इसके विस्तृत फैलाव का संकेत दे रहा है। प्रश्न उठता है कि क्या कंप्यूटर आज की जरूरत है ? इसका उत्तर है- कंप्यूटर जीवन की मूलभूत अनिवार्य वस्तु तो नहीं है। किंतु इसके बिना आज की दुनिया अधूरी जान पड़ती है। सांसारिक गतिविधियों, परिवहन और संचार उपकरणों आदि का ऐसा विस्तार हो गया है कि उन्हें सुचारू रूप से चलाना अत्यंत कठिन होता जा रहा है।पहले मनुष्य जीवन भर में अगर सौ लोगों के संपर्क में आता था तो आज वह दो हजार लोगों के संपर्क में आता है। पहले दिन में पाँच-दस लोगों से मिलता था तो आज पचास-सौ लोगों से मिलता है। पहले वह दिन में काम करता था तो आज रात भी व्यस्त रहती हैं। आज व्यक्ति के संपर्क बढ़ रहे हैं, व्यापार बढ़ रहे हैं, गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, आकांक्षाएँ बढ़ रही हैं, साधन बढ़ रहे हैं। इस अनियंत्रित गति को सुव्यवस्था देने की समस्या आज की प्रमुख समस्या है। कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी है। इस आवश्यकता ने अपने अनुसार निदान ढूँढ लिया है। कंप्यूटर एक ऐसी स्वचालित प्रणाली है जो कैसी भी अव्यवस्था को व्यवस्था में बदल सकती है। हड़बड़ी में होने वाली मानवीय भूलों के लिए कंप्यूटर रामबाण औषधि है। क्रिकेट के मैदान में अंपायर की निर्णायक भूमिका हो या लाखों-करोड़ों की लंबी-लंबी गणनाएँ कंप्यूटर पलक झपकते ही आपकी समस्या हल कर सकता है। पहले इन कामों को करने वाले कर्मचारी हड़बड़ाकर काम करते थे, एक भूल से घबराकर और अधिक गड़बड़ी करते थे। परिणामस्वरूप काम कम, तनाव अधिक होता था। अब कंप्यूटर की सहायता से काफी सुविधा हो गई है। 
क. वर्तमान युग कंप्यूटर का युग क्यों हैं ?  
(i) कंप्यूटर के बिना जीवन की कल्पना असंभव सी हो गयी है। 
(ii) कंप्यूटर ने पूरे विश्व के लोगों को जोड़ दिया है। 
(iii) कंप्यूटर जीवन की अनिवार्य मूलभूत वस्तु बन गया है। 
(iv) कंप्यूटर मानव सभ्यता के सभी अंगों का अभिन्न अवयव बन चुका है।
उत्तर-(i) कंप्यूटर के बिना जीवन की कल्पना असंभव सी हो गयी है।  
ख. गद्यांश के अनुसार कंप्यूटर के महत्त्व के विषय में कौन-सा विकल्प सही है-
(i) कंप्यूटर काम के तनाव को समाप्त करने का उपाय है। 
(ii) कंप्यूटर कई मानवीय भूलों को निर्णायक रूप से सुधार देता है। 
(iii) कंप्यूटर के आने से सारी हड़बड़ाहट दूर हो गई है। 
(iv) मानव की सारी समस्याओं का हल कंप्यूटर से संभव है।
उत्तर-(ii) कंप्यूटर कई मानवीय भूलों को निर्णायक रूप से सुधार देता है।  
ग. गद्यांश के अनुसार किस आवश्यकता ने कंप्यूटर में अपना निदान ढूँढ लिया है ? 
(i) अनियंत्रित  कर्मचारियों को अनुशासित करने की। 
(ii) अनियंत्रित गति को सुव्यवस्था देने की। 
(iii) अधिक से अधिक लोगों से जुड़ जन-जागरण लाने की। 
(iv) अधिक से अधिक कार्य कभी भी व कहीं भी करने की।
उत्तर-(ii) अनियंत्रित गति को सुव्यवस्था देने की।
घ. कंप्यूटर के प्रयोग से पहले अधिक तनाव क्यों होता था ? 
(i) लंबी-लंबी गणनाएँ करनी पड़ती थी। 
(ii) गलतियों के डर से कर्मचारी घबराए रहते थे। 
(iii) क्रिकेट मैचों में गलत निर्णय का ख़तरा रहता था। 
(iv) मानवीय भूलों के कारण बड़ी दुर्घटनायें होती थीं।
उत्तर-(ii) गलतियों के डर से कर्मचारी घबराए रहते थे। 
ङ.  कंप्यूटर के बिना आज की दुनिया अधूरी है क्योंकि- 
(i) सारी व्यवस्था उपकरण और मशीनें कंप्यूटरीकृत हैं। 
(ii) कंप्यूटर ही मानव एकीकरण का आधार है। 
(iii) कंप्यूटर ने सारी प्रक्रियायें आसान बना दी हैं। 
(iv) कंप्यूटर द्वारा मानव सभ्यता अधिक समर्थ हो गई है।
उत्तर-(i) सारी व्यवस्था उपकरण और मशीनें कंप्यूटरीकृत हैं। 

4. पंडित अलोपीदीन अपने सजीले रथ पर सवार, कुछ सोते, कुछ जागते चले आ रहे थे। अचानक कई गाड़ीवानों ने घबराए हुए आकर उन्हें जगाया और बोले- महाराज ! दारोगा ने गाड़ियाँ रोक दी हैं और घाट पर खड़े आपको बुला रहे हैं। पंडित आलोपीदीन का लक्ष्मी जी पर अखंड विश्वास था। वह कहा करते थे कि संसार का तो कहना हो क्या, स्वर्ग में भी लक्ष्मी का ही राज्य है। उनका यह कहना यथार्थ ही था । न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं, इन्हें वह जैसे चाहती हैं वैसे ही नचाती हैं लेटे-ही-लेटे गर्व से बोले- चलो हम आते हैं। यह कहकर पंडित जी ने बड़ी निश्चितता से पान के बीड़े लगाकर खाए। फिर लिहाफ ओढ़े हुए दारोगा के पस आकर बोले- बाबू जी आशीर्वाद! कहिए, हमसे ऐसा कौन-सा अपराध हुआ कि गाड़ियाँ रोक दी गईं। हम ब्राह्मणों पर तो आपकी कृपा-दृष्टि रहनी चाहिए।वंशीधर रुखाई से बोले-सरकारी हुक्म! पंडित अलोपीदीन ने हँसकर कहा, हम सरकारी हुक्म को नहीं जानते और न सरकार का हमारे सरकार तो आप हो है। हमारा और आपका तो घर का मामला है, हम कभी आप से बाहर हो सकते हैं ? आपने व्यर्थ कर कष्ट उठाया। यह हो नहीं सकता कि इधर से जाएँ और इस घाट के देवता को भेंट न चढ़ाएँ ! मैं तो आपको सेवा में स्वयं ही आ रहा था। वंशीधर पर ऐश्वर्य की माहिती वंशी का कुछ प्रभाव न पड़ा। ईमानदारी को उमंग थी कड़ककर बोले, हम उन नमकहरामों में नहीं है जो कौड़ियों पर अपना ईमान बेचते फिरते हैं आप इस समय हिरासत में हैं । कायदे के अनुसार आपका चालान होगा । बस मुझे अधिक बातों की फुर्सत नहीं है। जमादार बदलूसिंह! तुम इन्हें हिरासत में ले चलो, मैं हुक्म देता हूँ। 
क.अलोपीदीन को गाड़ीवानों ने क्या कहकर उठाया ? 
(i) दारोगा गाड़ियाँ रोककर आलोपीदीन को बुला रहे हैं। 
(ii) दारोगा गाड़ियाँ रोक रहे हैं। 
(iii) दारोगा किसी को आगे नहीं जाने देंगे। 
(iv) घाट पर गाड़ियों रोक दी गई हैं।
उत्तर-(i) दारोगा गाड़ियाँ रोककर आलोपीदीन को बुला रहे हैं। 
ख. लक्ष्मी के लिए अलोपीदीन के क्या विचार थे ? 
(i) सिर्फ संसार में लक्ष्मी का वास है।
(ii) सिर्फ स्वर्ग में लक्ष्मी का वास है। 
(iii) न्याय और नीति लक्ष्मी पर नहीं टिके हैं। 
(iv) संसार ही नहीं स्वर्ग में भी लक्ष्मी का वास है।
उत्तर-(iv) संसार ही नहीं स्वर्ग में भी लक्ष्मी का वास है।  
ग. पंडित अलोपीदीन ने दारोगा से क्या कहा ? 
(i) हमें आपकी कृपा दृष्टि चाहिए। 
(ii) हम ब्राह्मणों पर तो आपकी कृपा-दृष्टि रहनी चाहिए। 
(iii) हम ब्राह्मणों पर आपकी दया बनी रहे। 
(iv) हम लोगों पर आप कृपा-दृष्टि बना रखी है। 
उत्तर-(ii) हम ब्राह्मणों पर तो आपकी कृपा-दृष्टि रहनी चाहिए। 
घ. यहाँ 'भेंट' शब्द का क्या अभिप्राय है ? 
(i) एक व्यक्ति के द्वारा दूसरे व्यक्ति को दी गई भेंट  
(ii) दी जाने वाली रिश्वत 
(iii) दिया जानेवाला उपहार
(iv) दी जाने वाली अपार संपत्ति
उत्तर-(ii) दी जाने वाली रिश्वत   
ङ. परिच्छेद को उचित शीर्षक दीजिए । 
(i) पांडत अलोपोदीन और लक्ष्मी 
(ii) बेईमान दरोगा 
(iii) ईमानदार दरोगा 
(iv) ईमानदारी की जीत
उत्तर-(iv) ईमानदारी की जीत

5.व्यक्ति चित्त सब समय आदर्शों द्वारा चालित नहीं होता। जितने बड़े पैमाने पर मनुष्य की उन्नति के विधान बनाए गए, उतनी ही मात्रा में लोभ, मोह जैसे विकार भी विस्तृत होते गए, लक्ष्य की बात भूल गए, आदशों को मलाक का विषय बनाया गया और संयम को दकियानूसी मान लिया गया। परिणाम जो होना था, वह हो रहा है । यह कुछ थोड़े-से लोगों के बढ़ते हुए लोभ का नतीजा है, परंतु इससे भारतवर्ष के पुराने आदर्श और भी अधिक स्पष्ट रूप से महान और उपयोगी दिखाई देने लगे हैं। भारतवर्ष सदा कानून को धर्म के रूप में देखता आ रहा है। आज एकाएक कानून और धर्म में अंतर कर दिया गया है। धर्म को धोखा नहीं दिया जा सकता, कानून को दिया जा सकता है । यही कारण है कि जो धर्मभीरु है, वे भी त्रुटियों से लाभ उठाने में संकोच नहीं करते। इस बात के पर्याप्त प्रमाण खोजे जा सकते हैं कि समाज के ऊपरी वर्ग में चाहे जो भी होता रहा हो, भीतर-बाहर भारतवर्ष अब भी यह अनुभव कर रहा है कि धर्म कानून से बड़ी चीज़ है। अब भी सेवा, ईमानदारी, सच्चाई और आध्यात्मिकता के मूल्य बने हुए हैं। वे दब अवश्य गए हैं, लेकिन नष्ट नहीं हुए हैं। आज भी वह मनुष्य से प्रेम करता है। महिलाओं का सम्मान करता है, झूठ और चोरी को गलत समझता है, दूसरों को पीड़ा पहुँचाने को पाप समझता है।
क. मनुष्य ने आदर्शों को मजाक का विषय किस कारण बना लिया?
(i) कानून 
(ii) उन्नति  
(iii) लोभ 
(iv) धर्मभीरुता
उत्तर-(iii) लोभ 
ख. धर्म एवं कानून के संदर्भ में भारत के विषय में कौन-सा कथन सबसे अधिक सही हैं - 
(i) महिलाओं का सम्मान धर्म तो है, पर कानून नहीं है। 
(ii) धर्म और कानून दोनों को धोखा दिया जा सकता है। 
(iii) भले लोगों के लिए कानून नहीं चाहिए और बुरे इसकी परवाह नहीं करते हैं। 
(iv) भारत का निचला वर्ग कदाचित अभी भी कानून को धर्म के रूप में देखता है।
उत्तर-(iii) भले लोगों के लिए कानून नहीं चाहिए और बुरे इसकी परवाह नहीं करते हैं।
ग. भारतवर्ष में सेवा, ईमानदारी, सच्चाई के मूल्य सही विकल्प पहचानकर वाक्य पूरा करें- 
(i) मनुष्य की समाज पर निर्भरता में कमी होने के कारण इनमें हास हुआ है। 
(ii) जीवन में उन्नति के बड़े पैमाने के कारण कहीं छिप से गए हैं। 
(iii) न्यायालयों में कानून की सत्याभासी धाराओं में उलझ कर रह गए हैं। 
(iv) आध्यात्मिकता के मूल्य बने हुए हैं। 
उत्तर-(iv) आध्यात्मिकता के मूल्य बने हुए हैं। 
घ. भारतवर्ष का बड़ा वर्ग बाहर भीतर कदाचित क्याअनुभव कर रहा है ? 
(i) धर्म, कानून से बड़ी चीज़ है। 
() कानून, धर्म से बड़ी चीज़ है। 
(iii) संयम अशक्त और अकर्मण्य लोगों के लिए है। 
(iv) आदर्श और उसूलों से यथार्थ जीवन असंभव है। 
उत्तर-(i) धर्म, कानून से बड़ी चीज़ है।
ङ. निम्नलिखित में से सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक का चयन कीजिए- 
(i) उन्नति के सन्दर्भ में जीवन मूल्यों की प्रासंगिकता 
(i) मानव चित्त के आकर्षण निवारण में आदशों की भूमिका 
(iii) समाज कल्याण हेतु धर्म और कानून का सहअस्तित्व 
(iv) धार्मिक व सार्वभौमिक मूल्यों का एकीकरण
उत्तर-(i) उन्नति के सन्दर्भ में जीवन मूल्यों की प्रासंगिकता

6.यह काफी पुरानी घटना है। तब तमिलनाडु राज्य का नाम मद्रास था। मद्रास प्रांत के एक स्टेशन के निकट एक प्वाईंटमैन अपना प्वाईंट ( वह उपकरण जिससे गाड़ियों का ट्रैक बदला जाता है ) पकड़े खड़ा था। दोनों ओर से दो गाड़ियों अपनी पूरी गति से दौड़ी चली आ रही थी। उस दिन मौसम खराब था और वह आँधी - तूफान का संकेत दे रहा था। ऐसे भयावह मौसम में रोशनी के भी भरपूर साधन नहीं थे। प्वाईंटमैन अपने काम के लिए मुस्तैदी से तैयार था। तभी उसे अपने पैरों पर कुछ रेंगता हुआ महसूस हुआ। उसने देखा तो दंग रह गया। एक साँप उसके पैरों से लिपट रहा था। प्वाईंट उसके हाथ में था। डर के कारण उसकी घिग्घी बँध गई । किंतु तभी उसने सोचा कि यदि वह प्वाईंट हाथ से छोड़ देगा तो ऐसे में दोनों गाड़ियाँ परस्पर भिड़ जाएँगी और असंख्य लोगों की मृत्यु हो जाएगी। साँप के काटने से तो अकेले सिर्फ उसकी जान जाएगी लेकिन, असंख्य लोगों की जान बच जाएगी। कम- से-कम मरते-मरते वह असंख्य लोगों की जान बचाने का पुण्य तो अर्जित कर ही लेगा। यह सोचकर वह बिना हिले-डुले प्वाईंट को पकड़े खड़ा रहा। कुछ ही देर में दोनों रेलगाड़ियों की घड़घड़ाहट तेज़ हुई और रेलगाड़ियाँ आराम से प्वाईंटमैन के द्वारा पकड़े गए प्वाईट की सहायता से अलग-अलग ट्रैक पर निकल गईं। उधर साँप रेलगाड़ियों की घड़घड़ाहट सुनकर प्वाईंटमैन का पैर छोड़कर चला गया। रेलगाड़ियों के जाने के बाद जब प्वाईंटमैन का ध्यान अपने पैरों की ओर गया तो वह यह देखकर दंग रह गया कि वहाँ कुछ न था। यह देखकर उसके मन से स्वत: ही निकला, 'सच ही है, जो इंसान सच्चे मन से लोगों की मदद करते हैं उनकी सहायता ईश्वर स्वयं करते हैं। बाद में जब इस घटना का पता अधिकारियों को चला तो उन्होंने न सिर्फ प्वाईंटमैन को शाबाशी दी अपितु उसे पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। 
क.प्वाईंटमैन का क्या काम होता है ? 
(i) मशीनों को ठीक करना।
(ii) उपकरण द्वारा गाड़ियों की मरम्मत करना। 
(iii) गाड़ियों का ट्रैक बदलना। 
(iv) इनमें से कोई नहीं । 
उत्तर-(iii) गाड़ियों का ट्रैक बदलना।  
ख. प्वाईंटमैन क्या देखकर दंग रह गया ? 
(i) अपने पैरों में साँप को लिपटते देखकर। 
(ii) गाड़ी के सामने व्यक्ति को आता देखकर। 
(iii) भयानक शेर को सामने आता देखकर। 
(iv) भयानक आकृति को आता देखकर। 
उत्तर-(i) अपने पैरों में साँप को लिपटते देखकर। 
ग. साँप कैसे भाग गया ? 
(i) गाड़ी के हॉर्न की आवाज सुनकर। 
(ii) आदमी के पैरों की आहट सुनकर। 
(iii) रेलगाड़ियों की घड़घड़ाहट सुनकर। 
(iv) इनमें से कोई नहीं। 
उत्तर-(iii) रेलगाड़ियों की घड़घड़ाहट सुनकर।
घ. प्वाईंटमैन ने साँप के भागने पर क्या सोचा ? 
(i) जो इंसान परोपकार नहीं करते ईश्वर उनकी सहायता करते हैं। 
(ii) जो इंसान आस्तिक होते हैं ईश्वर उनकी मदद करते हैं। 
(iii) जो इंसान दुराचारी होते हैं ईश्वर उनकी मदद करते हैं । 
(iv) जो इंसान सच्चे मन से लोगों की मदद करते हैं, ईश्वर उनकी सहायता स्वयं करते हैं। 
उत्तर-(iv) जो इंसान सच्चे मन से लोगों की मदद करते हैं, ईश्वर उनकी सहायता स्वयं करते हैं।
ङ. प्वाईंटमैन को शाबाशी क्यों दी गई ? 
(i) उसने सभी लोगों को गाड़ी में बिठाया था। 
(ii) उसने स्टेशन पर गरीब लोगों की मदद की थी। 
(iii) उसने स्टेशन पर भिखारियों को खाना खिलाया था। 
(iv) उसने अपनी जान पर खेलकर असंख्य लोगों की जान बचाई थी। 
उत्तर-(iv) उसने अपनी जान पर खेलकर असंख्य लोगों की जान बचाई थी।