रहीम के दोहे
रहीम के दोहे अति लघु उत्तरीय प्रश्न 1. कवि रहीम के अनुसार प्रेम के धागे को किस प्रकार नहीं टूटने देना चाहिए? उत्तर- कवि रहीम के अनुसार प्...
Tuesday, 27 April 2021
KAHANI ....Sbse Bda Dhram, Dusron Ke Dukh Me Bhagidar Bno /सबसे बड़ा धर्म, दूसरों के दुःख में भागीदार बनो
Sunday, 25 April 2021
नैतिक शिक्षा देती कहानी : पिता की तीन सीख ,महानता
Saturday, 24 April 2021
CLASS 6,7,8 MCQ VARN VICHAR...वर्ण विचार
MCQ Dukh ka Adhikar /दुःख का अधिकार CLASS 9.....
दुःख का अधिकार
बहुविकल्पीय प्रश्न
1. भगवाना अपना तथा अपने परिवार का निर्वाह किस प्रकार करता था ?(ii) परचून की दुकान से
(iii) मज़दूरी करके
(iv) फेरी लगाकर कपड़ा बेचकर
Thursday, 22 April 2021
साखी...भावार्थ ...SAKHI ......CLASS 10 NCERT SOLUTIONS
कबीर ......कवि-परिचय:
भावार्थ : प्रस्तुत साखी में कबीरदास जी समाज कल्याण की भावना रखते हुए कह रहे हैं कि
-हमने पहले ज्ञान की जलती लकड़ी की मशाल से अपने अंदर की बुराइयों के घर में आग लगा दी।
अब उस ज्ञान की जलती लकड़ी को हमने अपने हाथों में उठा लिया है और अब उससे हम समाज की बुराइयों को जलाने का प्रयास करेंगे।
जो भी हमारे साथ चलेगा, इस ब्रह्म-ज्ञान को प्राप्त करने में साथ ही बनेगा, उसे भी मोह- माया, सांसारिक बंधन, अहंकार रूपी बुराइयों का अपना घर जलाना होगा।
कबीर कहते हैं कि मैंने मोह-माया के केंद्र इस संसार को जला दिया है।
ईश्वर-प्राप्ति के मार्ग पर चलने वाले को इस घर (सांसारिक बंधन, माया, मोह) को भस्म करना पड़ता है।
जैसे कि ज्ञान प्राप्ति के लिए भक्ति-मार्ग पर चलने के लिए काम, क्रोध, मोह आदि विषयों का त्याग करना होगा क्योंकि यही ज्ञान प्राप्ति में बाधक तत्व हैं।
अतः जो भी इस ब्रह्म-ज्ञान की ओर चलने के लिए मेरा साथी बनेगा, उसे भी अपना घर जलाना होगा।
Tuesday, 20 April 2021
Idioms in Hindi/ मुहावरे अर्थ सहित CLASS 10 ..BDE BHAI SAHAB .......MUHAVRE /बड़े भाई साहब.......
मुहावरे व लोकोक्तियाँ अर्थ सहित
1.अंधे के हाथ बटेर लगना - अयोग्य व्यक्ति को भाग्य से अच्छी वस्तु मिल जाना।
वाक्य: मोहन न तो योग्य व्यक्ति है और न ही उसने कभी इस अच्छी नौकरी की आशा नहीं थी, किंतु उसे यह नौकरी मिल गई। वास्तव में अंधे के हाथ बटेर लगे गई।
2.आँखें फोड़ना - पढ़ने का खूब काम करना।
वाक्य : उसने परीक्षा की तैयारी में दिन-रात अपनी आँखें फोड़ीं, फिर भी अच्छे अंक प्राप्त नहीं कर सका।
3. आटे-दाल का भाव मालूम होना- कठिनाई का पता चलना।
वाक्य: तुम अभी तक मौज-मस्ती करते रहे, किंतु अब परीक्षा की तैयारी करते हुए तुम्हें आटे-दाल का भाव मालूम हो जाएगा।
4. आड़े हाथों लेना- सबक सिखाना।
वाक्य: रवि अपने-आप को बहुत कुछ समझता है लेकिन आज में उसे आड़े हाथों लूँगा।
5. ऐरा-गैरा, नत्थू-खैरा-- महत्वहीन व्यक्ति।
वाक्य: तुम मुझे ऐरा-गैरा, नत्थू-खैरा मत समझना। मैं भी कभी तुम्हारे काम आ सकता हूँ।
6. खून जलाना -कठिन परिश्रम करना।
वाक्य: आपने इस काम में अपना खून भी जलाया, लेकिन उसका कोई फल नहीं मिला।
7. गाड़ी कमाई -अत्यधिक परिश्रम से प्राप्त धन।
वाक्य: मोहन ने जो अपनी गाढ़ी कमाई जमा कर रखी थी, लुटेरों ने उसे लूट लिया।
8. गिरह बाँधना - अच्छी तरह समझना।
वाक्य: शीला ने अपने माता-पिता की बातों को गिरह बाँध लिया है।
9. घाव पर नमक छिड़कना - दुखी को और अधिक दुखी करना।
वाक्य: हमें दूसरों का दुख दूर करना चाहिए न कि उसके घावों पर नमक छिड़कना चाहिए।
10. चक्कर आ जाना - बेहोशी की स्थिति जैसा होना।
वाक्य: अत्यधिक परिश्रम करते-करते मोहन को चक्कर आ गए।
11. चुल्लू भर पानी देने वाला - कठिन समय में साथ देने वाल।
वाक्य: इतना घमंड मत करो। रावण जैसे दंभी सम्राट के अंत में उसे कोई चुल्लू भर पानी देने वाला नहीं था।
12. छोटा मुँह बड़ी बात - हैसियत से बढ़-चढ़कर बोलना।
वाक्य: बड़ों को चुनौती देना तुम्हारे लिए छोटा मुँह बड़ी बात होगी।
13. जमीन पर पाँव नहीं पड़ना - बहुत इतराना,अत्यधिक घमंड करना।
वाक्य: कक्षा में प्रथम आने पर तुम्हारे पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे।
14. जी-तोड़ मेहनत करना - अत्यधिक परिश्रम करना।
वाक्य: तुमने जी-तोड़ मेहनत की थी इसलिए तुम इस प्रतियोगिता में सफल हुए हो।
15. जिगर के टुकड़े-टुकड़े होना -अत्यधिक दुख होना।
वाक्य: मोहन की व्यंग्य भरी बातें सुनकर मीरा के जिगर के टुकड़े टुकड़े हो गए।
16. टूट पड़ना- (क) बहुत गुस्सा करना (ख) भारी संख्या में आ पहुँचना।
वाक्य : (क) जब मैं खेल कर शाम को देरी से पहुँचा, तो पिताजी मुझ पर टूट पड़े।
(ख) किसान आंदोलन में भाग लेने के लिए भारी भीड़ टूट पड़ी।
17. तलवार खींच लेना -लड़ने के लिए तैयार हो जाना।
वाक्य : वीर शिवाजी ने दुश्मन को सामने देखकर अपनी तलवार खींच ली।
18. दबे पाँव आना- चुपके से आना।
वाक्य : मोहन काफी देर बाद घर लौटा। पिताजी के गुस्से से डरकर वह घर में दबे पाँव आया।
19. दाँतों तले पसीना आना -बहुत परिश्रम करना।
वाक्य : भारत की टीम से मैच जीतने में ऑस्ट्रेलियाई टीम के दाँतों तले पसीना आ गया।
20. दिमाग चक्कर खा जाना - समझ में न आना, परेशान हो जान।
वाक्य : विद्यालय में इतने सारे विषय पढ़कर मेरा दिमाग चक्कर खा गया।
21. दिमाग हो जाना- घमंड आ जाना।
वाक्य : कक्षा में प्रथम आने पर सोहन का बहुत दिमाग हो गया है।
22. नजर बचाना- बचते-बचते फिरना।
वाक्य : मकान का किराया समय पर न देने के कारण किराएदार मकान मालिक से नजर बचाए हुए हैं।
23. नामोनिशान मिट जाना - समूल नष्ट हो जाना।
वाक्य : जापान में सुनामी लहरों के आने से कई शहरों का नामोनिशान मिट गया।
24. निराशा के बादल छँटना - उदासी दूर होना।
वाक्य : खोए हुए बच्चे को पाकर माता-पिता के मन पर छाए निराशा के बादल छँट गए।
25. नींद उड़ जाना - बेचैनी बढ़ जाना।
वाक्य : परीक्षा के निकट आते ही छात्रों की नींद उड़ जाती है।
26. पापड़ बेलना- बहुत कष्ट झेलना।
वाक्य : रमेश को नौकरी पाने के लिए कई पापड़ बेलने पड़े।
27. प्राण सूखना - बहुत डर जाना।
वाक्य : भाई साहब को देखकर मेरे प्राण सूख गए।
28 . बूते से बाहर - सामर्थ्य न होना।
वाक्य : यह काम मेरे बूते के बाहर है, इसलिए मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ।
29. बे-सिर-पैर की बातें करना - व्यर्थ की बातें करना।
वाक्य : सुरेश से ज़्यादा बात मत किया करो। वह तो बे-सिर-पैर की बातें करता रहता है।
30. मुँह चुराना : शर्मिंदा होना।
वाक्य : ऐसा काम क्यों करते हो, जिसके कारण तुम्हें मुँह चुराना पड़े।
31. लगती बात कहना - चुभती हुई बात कहना।
वाक्य : सास ने अपनी बहू को ऐसी लगती बात कही कि वह रोने लगी।
32. लोहे के चने चबाना -बहुत मुश्किल काम करना।
वाक्य : भारत को आस्ट्रेलिया से मैच जीतने में लोहे के चने चबाने पड़े।
33. सिर फिर जाना- पगला जाना दिमाग, खराब हो जाना।
वाक्य : तुम्हारा सिर फिर गया है, क्या जो बेकार की बातें कर रहे हो।
34. सूक्ति बाण चलाना- व्यंग्यपूर्ण बातें करना।
वाक्य : आजकल बहुएँ सास पर सूक्ति-बाण चलाती हैं।
35. हाथ डालना - सम्मिलित होना।
वाक्य : इस मामले में मैंने भी हार डाला था, इसलिए मुझे भी धन्यवाद देना चाहिए।
36. हाथ-पाँव फूल जाना- बहुत घबरा जाना।
वाक्य : पुलिस को देखकर तुम्हारे हाथ-पाँव क्यों फूल गए?
Saturday, 17 April 2021
स्वदेश प्रेम....भावार्थ .(KAVITA) कवि 'माखनलाल चतुर्वेदी'
'स्वदेश प्रेम' कविता के माध्यम से कवि 'माखनलाल 'चतुर्वेदी' भारत की महिमा का गुणगान करते हुए कहते हैं कि इस मातृभूमि की सेवा में हमें पूरे तन-मन से करनी चाहिए क्योंकि इस धरती की सेवा करते हुए, इसे विकास के मार्ग पर ले जाते हुए इसे स्वर्ग के समान अर्थात उसके भाई का स्थान प्रदान करेंगे।
कवि कहते हैं कि इसी धरती पर हमने जन्म लिया। इसी धरती ने हमारा पालन किया है।
इस धरती का उपकार हम पर इतना ज़्यादा है कि हम उसे भूल भी नहीं पाएँगे।
इस धरती ने इतने उपकार किए हैं कि हम कौन-कौन से उसके उपकार गिनाएँ?
इस धरती के उपकारों का ऋण उतारने का हम पूरा प्रयत्न करेंगे पर शायद ही हम इस ऋण को उतार पाएँ।
कवि लोगों में देश प्रेम की भावना जगाते हुए कहते हैं कि तेरे लिए ही हम जिएँगे और तेरे लिए ही अपने प्राणों का बलिदान कर देंगे।
हे भारत! तेरी ही सेवा में हम अपना सारा जीवन बिताएँगे क्योंकि तू ही हमारा स्वर्ग है, तू ही हमारा मित्र और हमारा घर है। इस विश्व में भारत जैसी पवित्र भूमि कही नहीं है। यह धरती स्वर्ग के समान पवित्र है।
इसी पवित्र धरती से ही हमारा प्रेम का नाता है,जो चाह कर भी छूट नहीं सकता। इसलिए इसी धरती को हम स्वर्ग के समान सुंदर बनाएँगे।
कवि कहते हैं कि जो इस धरती पर जन्म लेकर भी अभी तक भ्रम और अहंकार से भरे हुए हैं और अपने कर्तव्य से दूर हैं।
उन प्यारे फूलों में अर्थात उन लोगों में देश प्रेम की भावना हम भरेंगे।
हम उन शत्रुओं का घमंड तोड़ेंगे जिनके अंदर अहंकार भरा हुआ है जो भारत की छवि को खराब करने का प्रयास करते हैं।
भारत की संस्कृति को ठेस पहुँचाने का प्रयास करते हैं। कवि ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहते हैं अब हमें तुम ही पूर्ण व पवित्र बल प्रदान करो जिससे हम अपने शत्रुओं का अहंकार तोड़ सके।
अपने देश को विकास के मार्ग पर ले जाने और देश में एकता में बनाए रखने के लिए हमे आपके शेयर की आवश्यकता है।
आप के सहारे के बिना हम इस धरती के लिए कुछ भी नहीं कर पाएँगे।
कवि इस कविता के माध्यम से देशप्रेम और सेवाभाव की भावना देशवासियों के सामने प्रकट कर रहे हैं और सभी देशवासियों से यही उम्मीद करते हैं कि सभी देशवासी अपनी संस्कृति व धरती का सम्मान करें।
भारत की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। हमें अपने देश पर गर्व होना चाहिए।
1.कवि देश के लिए क्या करना चाहते हैं ?
उत्तर- कवि देश के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि वह अपना तन-मन सभी कुछ अपने देश पर कुर्बान कर दें क्योंकि इस देश ने ही उनका पालन पोषण किया है। यह मातृभूमि हमें जान से भी प्यारी है। हमें भारत देश ने ही उन्हें स्वाभिमान से जीना सिखाया है।
2. कवि 'बेहोश पड़े हैं' जो पंक्ति के माध्यम से क्या कहना चाहते हैं ?
उत्तर- 'बेहोश पड़े हैं' पंक्ति से कवि का तात्पर्य है कि जो लोग अभी तक देश के लिए कोई कार्य नहीं कर रहे या देश के विकास में अपना सहयोग नहीं दे रहे हैं,उन्हें जाग जाना चाहिए। साथ ही यह पंक्ति उन लोगों की ओर भी संकेत कर रही है जो देश में अराजकता फैलाते हैं। कवि कहते हैं कि उन्हें अब होश में आ जाना चाहिए क्योंकि भारतवासी एक हैं और भारत की एकता और अखंडता को कोई भी तोड़ नहीं सकता।
3. इस कविता का मुख्य संदेश क्या है ?
उत्तर- 'स्वदेश प्रेम' कविता से हमें यह संदेश मिलता है कि भारतवासी होने के नाते हमें अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटना चाहिए और जरूरत पड़ने पर अपने देश के लिए अपनी जान भी कुर्बान कर देनी चाहिए।
4.कवि ईश्वर से क्या माँग रहे हैं ?
उत्तर- कवि ईश्वर से कहते हैं कि हे ईश्वर हमें ऐसा पवित्र बल दो, शक्ति दो जिसके बल से हम अपने देश के रक्षा कर सकें। हम उस शक्ति के सहारे अपने देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर सकें। बिना आपके सहारे के हम अपने देश के लिए कुछ नहीं कर पाएँगे। हे ईश्वर! हमें इतना बल दो कि हम तेरी सेवा में इस मातृभूमि की सेवा में अपना पूरा जीवन बिता दें।
5.'स्वदेश प्रेम' कविता का मुख्य स्वर क्या है ?
उत्तर- 'स्वदेश प्रेम' कविता का मुख्य स्वर सेवाभाव व देश-प्रेम, देशभक्ति है। कवि चाहते हैं कि हम अपना सर्वस्व अपने देश के लिए अर्पित कर दें और भारत माता के चरणों में अपना जीवन व्यतीत करें।
6.हम भारत माता के ऋण से कभी मुक्त क्यों नहीं हो पाएँगे ?
उत्तर- कवि कहते हैं कि हम भारत माता के ऋण से कभी मुक्त नहीं हो पाएँगे क्योंकि इसी धरती पर हम ने जन्म दिया है और एक माँ की भाँति इसने हमारा पालन-पोषण किया है। जैसे एक पुत्र अपनी माँ के ऋण से मुक्त नहीं हो पाता उसी प्रकार हम भारत माता की संतान हैं और कभी इसके ऋण को उतार नहीं पाएँगे। हम यही पले बढ़े हैं इसी धरती पर हम पले-बढ़े, इसी ने हमारा संरक्षण किया है। इसलिए हम चाह कर भी इसके ऋण से कभी मुक्त नहीं हो पाएँगे।
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मुहावरे व लोकोक्तियाँ अर्थ सहित 1.अंधे के हाथ बटेर लगना - अयोग्य व्यक्ति को भाग्य से अच्छी वस्तु मिल जाना। वाक्य: मोहन न तो योग्य व्यक्त...
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HINDI NCERT SOLUTIONS CLASS 8, 9,10 SPARSH बहुविकल्पीय प्रश्न 1. भाषा की मूल इकाई ----------- कहलाती है । (i) वर्ण (ii) शब्द (iii) अक्ष...
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अपठित गद्यांश 1.जनसंख्या की वृद्धि भारत के लिए आज एक विकट समस्या बन गई है। यह समाज की सुख-संपन्नता के लिए एक भयंकर चुनौती है। महानगरों में क...