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Wednesday, 19 May 2021

लक्ष्मी का वास- लघु कथा

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एक नगर में एक बहुत धनी सेठ रहता था।  
एक रात सोते हुए नींद में उन्होंने सपने में देखा कि लक्ष्मी जी उनसे कह रही हैं कि मैंने बहुत दिनों तक तुम्हारे यहाँ निवास कर लिया है। 
अब तुम्हारे यहाँ रहने का मेरा समय समाप्त हो गया है। 
अब थोड़े दिनों के लिए मैं तुम्हारे यहाँ से चली जाऊँगी। जाने से पहले में तुम्हें कुछ वरदान में देना चाहती हूँ। तुम मुझसे वरदान में जो भी माँगना चाहते हो, वो माँग लो। 

सेठ माँ लक्ष्मी से बोले, "मैं वरदान माँगने से पहले अपने परिवार से सलाह करूँगा। 
मैं परिवार से सलाह करके आपको कल बताऊँगा। सुबह जब सेठ की नींद खुली, तो उसने पूरे परिवार को अपने सपने की सारी बात बताई। 
माँ लक्ष्मी से क्या माँगा जाए ? सेठ के सपने की बात सुनकर सब अपने-अपने विचार प्रकट करने लगे। कोई सदस्य कहता कि इतनी धन-दौलत माँग लो जिससे पूरा जीवन आराम से कट जाएगा, तो कोई कहता कि माँ लक्ष्मी से जीवन भर के लिए अन्न माँग लो, किसी सदस्य की सलाह थी कि माँ लक्ष्मी से बहुत सारी जमीन माँग ली जाए, जिसमें खेती करके अपना जीवन हम आराम से काट लेंगे। 

सेठ की छोटी बहू बहुत बुद्धिमान थी।  वह चुपचाप सबकी बातें सुन रही थी। 
अंततः वह बोली, पिताजी मेरे हिसाब से धन-दौलत और खेती-बाड़ी माँगना ठीक नहीं है क्योंकि यह सब लक्ष्मी जी के साथ ही चला जाएगा।  
आखिर यह सब लक्ष्मी जी का हिस्सा है। हमें इसकी बजाय परस्पर प्रेम का वरदान माँगना चाहिए। 
अगर परिवार के सभी सदस्यों में प्रेम बना रहेगा, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत ही आराम से कट जाएगी। 

सेठ को छोटी बहू की बात पसंद आई।
 रात को जब लक्ष्मी जी उसके सपने में आईं, तो उसने वरदान में माँ लक्ष्मी से परिवार का प्रेम माँगा। 
लक्ष्मी जी बहुत प्रसन्न हुईं। 
माँ लक्ष्मी ने सेठ से कहा, जिस परिवार में प्रेम होता है, उस परिवार के सदस्य आपस में प्रेम से रहते हैं।
 उस जगह, उस स्थान से मैं कभी नहीं जा सकती। इस प्रकार माँ लक्ष्मी सदा के लिए सेठ के घर में निवास करने लगी । 

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