HINDI BLOG : सच्चा मित्र,धन और मित्रता, - लघुकथा

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Wednesday, 12 May 2021

सच्चा मित्र,धन और मित्रता, - लघुकथा

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1.सच्चा मित्र
एक लड़के था उसके बहुत-से मित्र थे और उसे इस बात का बहुत अभिमान था। ज़्यादा संख्या में मित्र होने के कारण उसे मित्रों का घमंड हो गया। उस लड़के के  पिता का केवल एक ही मित्र था लेकिन था सच्चा।
एक बार पिता अपने पुत्र से बोले कि, "बेटा तुम्हारे तो बहुत सारे मित्र है न। चलो आज रात तुम्हारे सभी मित्रों  में से तुम्हारे सबसे अच्छे दोस्त की परीक्षा लेते हैं।
बेटा सहर्ष तैयार हो गया।
पिता पुत्र के साथ उसके सबसे खास मित्र के घर रात को एक बजे पहुँचे।
पुत्र ने अपने मित्र के दरवाजे पर दस्तक दी, पर उसने दरवाजा नहीं खोला।
पुत्र ने फिर भी बार-बार दरवाजा खटखटाया परंतु इतना खटखटाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला। लेकिन उन्हें सुनाई दिया कि अंदर से बेटे का दोस्त अपनी माताजी को कह रहा था...तुम कह दो माँ कि मैं घर पर नहीं हूँ।
अपने सबसे खास मित्र के ये शब्द सुनकर उसे बहुत दुःख हुआ।  वह उदास होकर  निराश मन से पिता के साथ वापस अपने घर लौट आया ।
कुछ दिनों बाद पिता ने अपने पुत्र से कहा चलो, आज मैं तुम्हें अपने दोस्त मिलवाने ले चलता हूँ।
पिता के साथ पुत्र पिता के उस मित्र के घर पहुँच गए और वहाँ पहुँचते ही पिता ने बाहर से ही अपने मित्र को आवाज़ लगाई।
मित्र ने अंदर से दिया कि थोड़ा ठहरो मित्र, बस दो मिनट में आकर दरवाजा खोलता हूँ।
दरवाजा खुला और जैसे ही मित्र बाहर आया तो दोनों उसे देखकर हैरान रह गए। उन्होंने देखा पिता के उस मित्र के एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में रुपए की पोटली है । 
यह देखकर पिता अपने मित्र से पूछते हैं कि, यह क्या है मित्र?
मित्र बोला.... इतनी रात को अगर मेरा मित्र ने मेरे दरवाजे पर आकर उसे खटखटाया है तो इसका मतलब है कि वह किसी-न-किसी मुसीबत में ज़रूर होगा।
देखो मित्र मुसीबत के दो रूप होते है एक रूप तो रुपये पैसे की जरूरत और दूसरा  किसी से झगड़ा या विवाद ।
मित्र यदि रुपये की आवश्यकता हो तुम्हें तो ये रुपये की पोटली अपने साथ ले जाओ। यदि झगड़ा हो गया है किसी से तब तो मैं ये तलवार लेकर तुम्हारे साथ वहाँ चलता हूँ।
अपने  मित्र की बात सुनकर और उसके दिल में अपने लिए प्रेम देखकर पिता की आँखे भर आई और अपने मित्र से उन्होंने कहा कि "मित्र मुझे किसी भी चीज की कोई जरूरत नहीं।  
मैं तो केवल अपने पुत्र को सच्चे मित्र और  मित्रता के बारे में समझा रहा था।"
हमेशा सोच-समझकर मित्र चुनो। ऐसे मित्र न चुनो जो खुदगर्ज़ हो, मतलबी हो और आपके काम पड़ने पर बहाने बनाने लगे। मित्र एक ही  पर सच्चा हो। अतः मित्र, एक चुनें लेकिन नेक चुनें।

2.धन और मित्रता 
विख्यात उद्योगपति हेनरी फोर्ड ने जीवन में वह सब कुछ हासिल किया, जिसकी हर व्यक्ति, हर इंसान को तमन्ना रहती है। 
हेनरी फोर्ड अपनी  जिंदगी में जब एक उच्च शिखर पर पहुँच गए थे । 
 एक इंटरव्यू में उनसे एक रिपोर्टर ने यह पूछा, "सर! आपने अपने जीवन में बहुत सारी धन-संपत्ति, दौलत आदि के साथ-साथ यश और कीर्ति भी कमाई है। 
आपने तो बहुत से महान कार्यों का संपादन भी किया है। आपको क्या जीवन में अब  भी किसी चीज़ की कमी का आभास होता है।"
जैसे किसी ने हेनरी फोर्ड की दुखती रग पर हाथ रख दिया हो। 
हेनरी फोर्ड ने तपाक से पत्रकार को कहा, "यह ठीक है कि मैंने पर्याप्त धन-संपदा और प्रतिष्ठा कमाई है किंतु मेरी जिंदगी में सच्चे मित्र की रिक्तता मुझे सताती रहती है। 
अगर मुझे मौका मिले फिर से जीवन शुरू करने का तो मैं तलाश करूँगा सच्चे मित्रों की। 
"यदि ऐसा करने का आप सोचते हैं तो मित्र तो बहुत से मिल सकते हैं,आपको जीवन में परंतु तब भी सच्चा मित्र नहीं मिलेगा आपको ।"  हेनरी फोर्ड को पत्रकार दो-टूक शब्दों में जवाब दिया। 
"वह क्यों?" हेनरी फोर्ड ने प्रश्न किया।  
पत्रकार ने हेनरी फोर्ड से कहा, " आप अपने धन के बल पर अपने लिए मित्रों की तलाश करना चाहते हैं। परंतु धन से कभी भी सच्चे मित्र नहीं मिल सकते। 
उसके लिए आपको अहंकार को त्यागना पड़ता है, स्वयं को मिटाना सीखना पड़ता है। इस संसार की हर चीज़ धन से खरीदी जा सकती है परंतु आपका भला चाहने वाला सच्चा हितैषी व सच्चा मित्र आसानी से नहीं मिल सकता है । 
"आप बिलकुल सही कह रहे हैं।" हेनरी फोर्ड ने उससे कहा।  
"मैं कुछ नहीं लौटा पाया अपने उन मित्रों को इतना धन कमाने के बाद भी जिन मित्रों ने मेरी मदद की। मैंने अपने जिन मित्रों से बचपन में हर तरह की सहायता और सहानुभूति पाई उनके लिए मैंने कुछ भी नहीं किया । 
मेरे और मेरे मित्रों के बीच इस धन और वैभव ने तो जैसे दीवार खड़ी कर दी है। अब जीवन के इस पड़ाव में मेरे पास तो ऐसा कोई मित्र नहीं है जिससे मैं अपने मन के विचार, अपने मन का दर्द, अपनी समस्याएँ पर खुलकर बात सकूँ। 
मैं तो अत्यंत अभागा हूँ सच में। मेरे पास सब कुछ है- धन, दौलत, शौहरत लेकिन सच्चा मित्र नहीं है मेरे पास।"

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