HINDI BLOG : बीरबल की स्वर्ग से वापसी

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Tuesday, 27 June 2023

बीरबल की स्वर्ग से वापसी

बीरबल की स्वर्ग से वापसी

बीरबल बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक थे। वे बीरबल को बहुत चाहते थे और सदा अपने साथ रखते थे। अकबर गुणी तथा प्रतिभाशाली व्यक्तियों का बहुत सम्मान किया करते थे। बीरबल अपनी सूझ-बूझ व दूरदर्शिता के कारण उनके प्रिय थे।

अकबर का बीरबल के प्रति विशेष अनुराग देख अन्य दरबारी उनसे ईर्ष्या करते थे। बीरबल से ईर्ष्या करने वालों में जुम्मन नाम का एक नाई भी था, जो प्रतिदिन अकबर की दाढ़ी बनाया करता था। वह बीरबल को नीचा दिखाने के लिए रोज़ नए हथकंडे अपनाता था, परंतु उसे कभी सफलता नहीं मिलती थी। अकबर की दाढ़ी बनाते समय भी वह अकसर अकबर को बीरबल के विरुद्ध भड़काया करता था। एक दिन जुम्मन नाई ने बीरबल को अपने रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा। अकबर की दाढ़ी बनाते

समय उसने अकबर से कहा, "जहाँपनाह, आपके पुरखों को जन्नत गए बहुत समय हो गया, परंतु उनकी खैरियत को कोई भी खबर आपको नहीं मिली।" अकबर ने कहा, "तेरा दिमाग तो ठीक है !

जन्नत से भी भला कोई खबर आती है?" नाई बोला, "जहाँपनाह, आपके पास बीरबल जैसा समझदार मंत्री है। अगर आप उसे हुक्म दें तो वह जन्नत से आपके पुरखों की खैरियत लाने का कोई-न-कोई उपाय अवश्य ढूँढ़ निकालेंगे।"

शाहंशाह के मन में जुम्मन नाई की बात अटक गई। उन्होंने बीरबल को जन्नत में भेजने का फ़ैसला कर लिया। तभी बीरबल वहाँ पहुँचे। उन्हें देख अकबर बोले, "क्यों बीरबल, क्या तुम जन्नत जाकर हमारे पुरखों का समाचार ला सकते हो?"

अकबर की बात सुनकर बीरबल हैरान रह गए। उन्होंने मंद-मंद मुसकराते हुए जुम्मन को देखा। वे समझ गए कि यह सब इसी का षड्यंत्र है। बीरबर ने कुछ देर सोचा, फिर बोले, "मैं जन्नत से आपके पुरखों का समाचार लाने के लिए तैयार हूँ, परंतु इसके लिए मुझे कुछ मोहलत तथा धन को आवश्यकता है।

अकबर ने पूछा, "तुम्हें कितना धन तथा कितनी मोहलत चाहिए?" बीरबल ने कहा, "जहाँपनाह, दस दिन की मोहलत तथा दस हजार अशर्फियाँ चाहिए।"

अकबर ने बीरबल को दस हज़ार सोने की अशर्फियाँ दिला दी। बीरबल अपने घर चला गया। उसने अपने घर में राजगीरों को बुलाया। दिन में वह अपनी हवेली की मरम्मत करवाता तथा रात में घर के पीछे बगीचे में ले जाकर उनसे सुरंग खुदवाता। दस दिन में उसने अपनी हवेली में से एक सुरंग निकलवा ली जो घर से कब्रिस्तान तक खोदी गई थी।

दस दिन बाद बीरबल अकबर के पास गए और बोले, "मैं जन्नत जाने के लिए तैयार हूँ।" बीरबल ने अपनी कब वहाँ खुदवाई, जहाँ उसने सुरंग बनवाई थी। बीरबल को जिंदा दफ़न होते, देखने के लिए बहुत से लोग आए। अकबर स्वयं वहाँ बीरबल को देखने के लिए पहुँचे।

बीरबल के कब्र में लेटने के बाद ऊपर से मिट्टी डाल दी गई। जुम्मन अपने षड्यंत्र के सफल होने पर फूला नहीं समा रहा था। लोग सोच रहे थे कि बीरबल ने बेवजह मौत को गले लगा लिया। भला जन्नत से भी कोई वापस आ सकता है!

बीरबल कब्र के नीचे खुदी सुरंग से होकर अपनी हवेली में पहुँच गए। वे घर में आराम से रहने लगे। कुछ दिन बीत जाने के बाद अकबर को बीरबल की याद आने लगी। कई बार अकबर बीरबल को याद करके बेचैन हो जाते थे। इसी तरह एक माह बीत गया।

एक दिन अकबर बीरबल की याद में खोए हुए थे और जुम्मन उनकी दाढ़ी बना रहा था। तभी बादशाह की नज़र सामने से आते हुए बीरबल पर पड़ी। वे उन्हें देखकर चौंक गए। बीरबल की दाढ़ी तथा बाल बढ़े हुए थे।

अकबर और बीरबल बड़े ही उत्साह से गले मिले। अकबर ने पूछा, "कहो बीरबल, क्या मेरे पुरखे जन्नत में ठीक हैं?"

बीरबल बोला, "जहाँपनाह आपके पुरखे जन्नत में बहुत खुश हैं। जब उन्हें पता चला कि मुझे आपने भेजा है तो वे बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने मेरा बड़ा सत्कार किया। मेरा तो वहाँ बड़ा मन लग गया था, परंतु मुझे खास वजह से वापस आना पड़ा। वैसे तो आपके पुरखे आराम से हैं, तकलीफ़ है।"

बीरबल ने कहा, “जहाँपनाह, आपके पुरखे इसलिए दुखी हैं, क्योंकि वहाँ कोई नाई नहीं है। उनकी अकबर ने पूछा, “क्या तकलीफ़ है उन्हें?" दाढ़ी और बाल बहुत लंबे हो गए हैं। देखिए, एक माह में मेरी दशा भी नाई के बिना कैसी हो गई है!" अकबर ने कहा, "नाई की कमी हम जुम्मन को भेजकर पूरी कर देते हैं।"

यह सुनकर जुम्मन काँप उठा। उसने बीरबल के लिए बुरा सोचा था। अब उसका बुरा होने वाला था। अगले दिन अकबर ने जुम्मन को दफ़नाने का हुक्म दे दिया। जुम्मन विरोध भी न कर सका। अपनी सूझ-बूझ से बीरबल ने न केवल अपने ऊपर आई विपत्ति को टाला, बल्कि एक षड्यंत्रकारी का भी अंत कर दिया। 

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